कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने युवा वकीलों से कहा है कि वे सवाल पूछना कभी बंद न करें, अपने मूल्यों से समझौता न करें और आम लोगों को कभी न भूलें। उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र वह नहीं है, जहां हर व्यक्ति सरकार की बात से सहमत हो, बल्कि वह है जहां नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने की आजादी मिले। शिवकुमार ने ये बातें शनिवार को बंगलूरू स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) के 34वें दीक्षांत समारोह में कहीं।
समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और अन्य न्यायाधीश मौजूद थे। शिवकुमार ने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों से लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और न्याय व्यवस्था की रक्षा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने चुनौतियां हैं। ऐसे समय में युवा वकीलों और नीति बनाने वालों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें संविधान की रक्षा करने के साथ हर नागरिक तक न्याय पहुंचाने के लिए काम करना चाहिए।
शिवकुमार ने युवा वकीलों को सवाल पूछते रहने की सलाह क्यों दी?
शिवकुमार ने कहा कि युवा वकीलों को सवाल पूछने, विचारों पर बहस करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें चुनौती देने से पीछे नहीं हटना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल सवाल उठाना काफी नहीं है, बल्कि समस्याओं का समाधान खोजने की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। उनके मुताबिक, संविधान के सिद्धांत केवल किताबों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि शासन, नीतियां बनाने और सार्वजनिक जीवन में भी उनका पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को केवल अधिक वकीलों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे वकीलों की जरूरत है जिनमें ईमानदारी, संवेदनशीलता और साहस हो। उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी सही बात के साथ खड़ा होना चाहिए।
युवा वकीलों के लिए कर्नाटक सरकार ने क्या घोषणा की?
मुख्यमंत्री ने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए दो अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने और युवा वकीलों को आगे की पढ़ाई तथा प्रशिक्षण में मदद देने के लिए एक विशेष संस्थान स्थापित करेगी। इसके अलावा, सरकार एनएलएसआईयू में स्टार्टअप लॉ क्लिनिक को भी सहयोग देगी। इस क्लिनिक में विद्यार्थी, शिक्षक और वकील युवा उद्यमियों को बिना फीस लिए कानूनी सलाह देंगे। इसका उद्देश्य नए कारोबार शुरू करने वाले युवाओं को कानूनी मामलों में सहायता उपलब्ध कराना है।
अदालतों में लंबित मामलों पर शिवकुमार ने क्या कहा?
शिवकुमार ने अदालतों में लंबित मामलों को न्याय व्यवस्था की बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं और कई लोग तथा परिवार न्याय मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी अदालत के लिए कोई मामला सिर्फ एक संख्या हो सकता है, लेकिन संबंधित व्यक्ति के लिए वह उसकी जिंदगी का सवाल होता है। इसलिए न्याय की प्रक्रिया को तेज, सरल, सस्ता और सभी की पहुंच में बनाना जरूरी है। उन्होंने युवा वकीलों से किसानों, मजदूरों, महिलाओं और आम परिवारों की समस्याओं को समझने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।