प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई जोन-II ने गत सप्ताह 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद में 20 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर चल रहे ऑनलाइन सट्टेबाजी/गेमिंग और साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट की जांच के सिलसिले में की गई है। यह जांच ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म "ऑल पैनल एक्सचेंज" और एमजीएम91 से जुड़े दो मामलों (प्रेडिकेट ऑफेंस) पर आधारित है। इनमें शिकायतकर्ताओं को पैसे जमा करने के लिए उकसाया गया और बाद में उनके साथ धोखाधड़ी की गई।
ईडी की जांच से पता चला है कि दोनों सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के पीड़ितों से जुटाई गई रकम को घुमा-फिराकर अंततः पुणे स्थित एक ऐसी इकाई के बैंक खातों में पहुंचाया गया, जिसे राम यू. रामधानी ने स्थापित किया था। इस इकाई ने "आईपैसा" नाम का एक इन-हाउस पेमेंट इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म विकसित किया। इसके जरिए, ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और साइबर धोखाधड़ी करने वालों (तथा उनके एजेंटों, जिन्हें "चैनल पार्टनर/कैरी एंड फॉरवर्ड एजेंट" कहा जाता है) की ओर से 200 से अधिक शेल/फ्रंट कंपनियों को जोड़ा गया। इन्हें आंतरिक रूप से "मर्चेंट" कहा जाता था।
जांच से पता चला है कि ऑनलाइन गेमिंग/सट्टेबाजी/साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों से वसूली गई रकम को 'म्यूल' बैंक खातों (दूसरों के नाम पर खोले गए खातों) के एक बड़े नेटवर्क के जरिए इधर-उधर भेजा जाता था। इन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स को चलाने वालों और अपराध से मिली रकम को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल की गई फर्जी कंपनियों (शेल एंटिटीज) की पहचान कर ली गई है।
यह भी सामने आया है कि इन ऑनलाइन सट्टेबाजी/गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को चलाने वाले कई लोगों को दुबई में बैठे कुछ लोग निर्देश दे रहे थे। इस सिंडिकेट को कुछ सहकारी बैंकों (कोऑपरेटिव बैंकों) से भी मदद मिल रही थी, जिनके सिस्टम का इस्तेमाल अवैध कमाई को इकट्ठा करने और उसे कई परतों में छिपाने के लिए किया गया। ऑनलाइन सट्टेबाजी/गेमिंग और साइबर धोखाधड़ी से हासिल की गई अवैध रकम को मुख्य रूप से तीन तरीकों से बाहर निकाला जाता था।
पहला, व्यापारिक लेनदेन की आड़ में 'ओवर-इनवॉइसिंग' (असली कीमत से ज्यादा का बिल बनाना) के जरिए। दूसरा, एपीएमसी इकाइयों के नाम पर खोले गए 'म्यूल' खातों से नकद निकासी करके और तीसरा, अवैध रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर उसे भारत से बाहर भेजकर। तलाशी अभियान के दौरान, अपराध से प्राप्त धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को इधर-उधर करने और छिपाने से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए और जब्त कर लिए गए।
इसके अलावा, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों के कई बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया गया है। इस मामले में, ईडी ने पहले पुणे, मुंबई और बंगलूरू में कई जगहों पर तलाशी ली थी और 'एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड' के संस्थापक राम यू. रामधानी को गिरफ्तार किया था, जो अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अवैध वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने और उन्हें खत्म करने, तथा पीएमएलए, 2002 को सख्ती से लागू करने के अपने मिशन पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।