जिस दिव्यांग महिला के इरादे को माउंट एवरेस्ट जैसा विशालकाय पर्वत भी न डिगा सका, उसके विश्वास को इस देश की व्यवस्था ने तोड़ दिया। राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा के साथ उज्जैन के महाकाल मंदिर में ऐसा मजाक हुआ कि उन्हें यह कहना पड़ गया कि उनकी विकलांगता का मजाक उड़ाया गया है।
उन्होंने बताया कि 'मैं दो अन्य लोगों के साथ रविवार तड़के साढ़े चार बजे मंदिर पहुंची। राज्य की एक मंत्री के मेहमान के रूप में नाम दर्ज होने के कारण उम्मीद थी अच्छे से दर्शन हो जाएंगे। मगर उन्हें एलईडी स्क्रीन पर भस्मारती देखनी पड़ी और तो और गर्भगृह के दर्शन के लिए जाने के दौरान भी उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। परिचय और दिव्यांग होने के बारे में बताने पर भी वे नहीं माने। काफी देर तक बहस के बाद अकेले ही जाने की अनुमति दी। वहीं नंदी हॉल में जाने लगी तो फिर रोका। बार-बार परिचय देने पर बमुश्किल दर्शन हुए।'
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अरुणिमा ने कहा कि उन्होंने जिंदगी में कई विपदा देखीं पर कभी आंसू नहीं आए। सिन्हा ने कहा कि 'मुझे आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मुझे दर्शन करने में एवरेस्ट पर चढ़ने से भी अधिक दर्द हुआ। वहां पर मेरी विकलांगता का मजाक उड़ाया गया है।'