पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच भारत सरकार कहा है कि देश के किसानों को उर्वरकों की कमी नहीं होगी। उर्वरक विभाग ने शुक्रवार को इस मामले पर आधिकारिक बयान दिया। इसमें कहा गया कि घरेलू उत्पादन के लिए उर्वरकों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से संसाधन-समृद्ध देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते किए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने लोकसभा में बताया कि घरेलू प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी योजना के तहत क्षमता विस्तार को प्रोत्साहित कर रही है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के बयान में सरकार ने आयात पर निर्भरता और मिट्टी के पोषक तत्वों के असंतुलन से निपटते हुए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
ये भी पढ़ें: Ashok Kharat: अशोक खरात के खिलाफ SIT को मिलीं 50 शिकायतें, आठ एफआईआर दर्ज; उगाही से लेकर उत्पीड़न के लगे आरोप
प्रमुख उर्वरक कच्चे माल का आयात
वर्ष 2024-25 में उर्वरक कच्चे माल के आयात का अनुमानित हिस्सा इस प्रकार है:
घरेलू भंडार सीमित होने के कारण भारत प्रमुख उर्वरक कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण रूप से आयात पर निर्भर है।
हरित अमोनिया पर सरकार का जोर
वर्तमान में, उर्वरक कंपनियां 59.65 लाख मीट्रिक टन (LMT) की संयुक्त वार्षिक क्षमता वाले नए डीएपी/एनपीके (DAP/NPK) संयंत्रों के साथ-साथ 44.21 लाख मीट्रिक टन (LMT) की क्षमता वाले फॉस्फोरिक और सल्फ्यूरिक एसिड संयंत्र स्थापित कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत, उर्वरक क्षेत्र के लिए 7.24 लाख मीट्रिक टन (LMT) हरित अमोनिया की खरीद का प्रावधान किया गया है।
कुशल उर्वरक उपयोग को बढ़ावा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद मिट्टी परीक्षण-आधारित संतुलित निषेचन की सिफारिश करता है। यह केवल नाइट्रोजन पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय एनपीके उर्वरकों के संतुलित अनुप्रयोग की ओर से पूरक है। बयान में कहा गया है कि नाइट्रोजन के विभाजित अनुप्रयोग, उर्वरकों के उचित स्थानन, और पोषक तत्वों के नुकसान को कम करने के लिए धीमे-रिलीज उर्वरकों, नीम-कोटेड यूरिया और नाइट्रीफिकेशन इनहिबिटर के उपयोग जैसी प्रथाओं के माध्यम से कुशल उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित किया जाता है।
ये भी पढ़ें: न्यायिक रिक्तियों पर देरी बर्दाश्त नहीं: सीजेआई ने सभी हाई कोर्ट को लिखा पत्र, महिला जजों को लेकर कही ये बात
आईसीएआर किसान प्रशिक्षण, प्रदर्शनों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से क्षमता निर्माण में भी लगा हुआ है, ताकि अत्यधिक यूरिया की खपत को कम करने, संतुलित पोषक तत्व अनुप्रयोग सुनिश्चित करने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिल सके।
अन्य वीडियो