पीएम मोदी, नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे के मुद्दे पर बिहार में भी एनडीए गठबंधन की चारों पार्टियों के बीच दूरी दिखने लगी है। 2015 विधानसभा चुनावों में भाजपा से ज्यादा सीट जीतने वाली जनता दल (यूनाइटेड) सीट बंटवारे में इस परिणाम को आधार बनाने की मांग पर अड़ गई है। हालांकि भाजपा सूत्रों ने इस फॉर्मूले को यह कहकर नकार दिया है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व राजद से गठबंधन करने के कारण जेडीयू को ज्यादा सीट मिली थी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू की इस मांग पर भाजपा और गठबंधन में बिहार की अन्य दो पार्टियों लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान तथा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की तरफ से ऐतराज जताए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि एनडीए गठबंधन के सदस्यों के बीच सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर औपचारिक वार्ता शुरू होनी अभी बाकी है, लेकिन जेडीयू ने दबाव बनाने के लिए योग दिवस के कार्यक्रमों से दूर रहने के साथ ही साल के अंत में होने वाले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार अलग उतारने की घोषणा कर दी है। साथ ही अगले महीने इस मुद्दे पर रणनीति तय करने के लिए दिल्ली में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी बुलाई है।
भाजपा दे रही 2014 आम चुनाव की दुहाई
जेडीयू की तरफ से उठाई गई मांग को भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने अवास्तविक और चुनाव से पहले हर पार्टी की तरफ से अपनाया जाने वाला सामान्य राजनीतिक हथकंडा करार दिया है। उन्होंने जेडीयू को लोकसभा-2014 के चुनाव याद करने की सलाह दी है, जिनमें अकेले दम पर उतरी जेडीयू को 40 में से मात्र 2 लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी और अन्य सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई थी। भाजपा ने इन चुनावों में 22 और उसके गठबंधन सहयोगियों में लोजपा ने 6 व रालोसपा ने 3 सीटों पर विजय पताका फहराई थी।
विधानसभा चुनाव-2015 में ये था परिणाम
243 सीट में से जेडीयू ने जीती थीं 71 सीट
55 सीट ही जीत पाया था भाजपा, लोजपा व रालोसपा का गठबंधन
इसलिए भी जेडीयू कर रही है दावा
दरअसल वर्ष 2013 तक एकसाथ गठबंधन में रहीं जेडीयू और भाजपा में उस समय होने वाला सीटों का बंटवारा भी इस विवाद का एक कारण है। उस समय गठबंधन में जेडीयू की स्थिति बिहार में भाजपा से वरिष्ठ पार्टी की थी। इस कारण वर्ष 2014 के चुनावों में जेडीयू को 25, जबकि भाजपा को 15 सीट दिए जाने का फॉर्मूला तय था। लेकिन जेडीयू के गठबंधन छोड़ देने के बाद भाजपा की तरफ से इन चुनावों में हासिल की गई जीत के कारण समीकरण बदल गए हैं।