एक्सिओम मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्री
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अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS)
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किले जैसा है आईएसएस
आईएसएस धरती की बाहरी कक्षा में बना एक किला जैसा है। 1984 में इसे बनाने की मंजूरी दी गई थी। 2 नवंबर 2000 को पहला दल आईएसएस के लिए रवाना हुआ था। 41 अंतरिक्ष चहलकमदी के जरिये आईएसएस की पूरी असेंबलिंग हुई। आईएसएस के हर हिस्से को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया और जोड़ा गया। पिछले 25 साल में 270 अंतरिक्ष यात्री यहां आ चुके हैं। आईएसएस का वजन 4,00,000 किलोग्राम से अधिक है। आईएसएस का कुल क्षेत्रफल 2,247 वर्ग मीटर है। इसके पैनल और अन्य ढांचे की लंबाई 109 मीटर है। यह एक जगह पर स्थिर नहीं है और पृथ्वी की परिक्रमा करता रहता है।
548 करोड़ भारत ने खर्च किए
भारत ने एक्सिओम-4 मिशन पर अब तक करीब 548 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें शुभांशु और उनके बैकअप ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर के प्रशिक्षण का खर्च भी शामिल है। ये पैसे प्रशिक्षण, उपकरण, और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में लगे हैं। यह मिशन गगनयान के लिए भारत के अभ्यास की तरह है।
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पहला कोई भारतीय आईएसएस पहुंचेगा
भारत कभी भी आईएसएस का हिस्सा नहीं रहा है। यह पहली बार है जब कोई भारतीय वहां पहुंचेगा। एक्सिओम मिशन भविष्य में भारत के चार बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार होगा। ये हैं, वर्ष 2027 में पहला मानव मिशन गगनयान भेजना, 2035 तक अंतरिक्ष में अपना अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करना और 2040 तक मानव चंद्रमा मिशन भेजना।
आज देख सकेंगे सीधा प्रसारण
नासा ने एक बयान में कहा कि अंतरिक्ष यान के आगमन का लाइव कवरेज बृहस्पतिवार, 26 जून को भारतीय समयानुसार दोपहर 2:30 बजे नासा प्लस पर देखा जा सकेगा। शुभांशु का यान अंतरिक्ष स्टेशन के हार्मोनी मॉड्यूल के अंतरिक्ष-मुखी पोर्ट पर भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे स्वचालित रूप से डॉक करेगा।