फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों में पदोन्नति को लेकर बढ़ा असंतोष, डीओपीटी को चेताने के लिए शुरू हुआ ट्विटर अभियान

Mon, 17 Jan 2022 08:37 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछले दिनों राष्ट्रीय राजधानी में डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन हुआ था, अब उसी तर्ज पर सीएसएस अधिकारी अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। इसके पहले चरण में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग 'डीओपीटी' को चेताने के लिए #SaveCSS हैशटैग के साथ एक रिले ट्विटर अभियान शुरू किया गया है....
विज्ञापन
सरकारी दफ्तर - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत सरकार की 'रीढ़ की हड्डी' कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के अधिकारियों में पदोन्नति को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से पदोन्नति को लेकर उनके साथ न्याय नहीं हो रहा। सीएसएस के अनेक अधिकारी, बिना प्रमोशन मिले ही रिटायर हो गए हैं। उन्हें किसी तरह का कोई वित्तीय लाभ भी नहीं मिल सका। जिस तरह से पिछले दिनों राष्ट्रीय राजधानी में डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन हुआ था, अब उसी तर्ज पर सीएसएस अधिकारी अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। इसके पहले चरण में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग 'डीओपीटी' को चेताने के लिए #SaveCSS हैशटैग के साथ एक रिले ट्विटर अभियान शुरू किया गया है।

विज्ञापन


केंद्र सरकार की मशीनरी में सीएसएस के अधिकारी डीओपीटी के माध्यम से एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर काम करते हैं। सीएसएस फोरम (सभी सीएसएस अधिकारियों की एसोसिएशन) के महासचिव मनमोहन वर्मा का कहना है कि डीओपीटी ने आरक्षण नीति मामलों पर नोडल विभाग होने के नाते सभी विभागों/मंत्रालयों को अन्य सेवा/पदों पर, जरनैल सिंह मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के परिणाम तक, पदोन्नति देते रहने के निर्देश दिए हैं। यह आश्चर्यजनक है कि अन्य सभी मंत्रालय और विभाग, डीओपीटी के निर्देशों के अनुसार सभी ग्रेडों में पदोन्नति कर रहे हैं, जबकि खुद डीओपीटी के अंतर्गत आने वाली सीएस डिवीजन अपने ही सीएसएस/सीएसएसएस/सीएससीएस अधिकारियों को समय पर पदोन्नति नहीं दे रही है। इससे अफ़सरों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

सीएसएस फोरम के मुताबिक, पिछले सात वर्षों से सर्वोच्च न्यायालय में आरक्षण संबंधी कई केस लंबित हैं। डीओपीटी की सीएस डिवीजन ने इन्हीं केसों का हवाला देते हुए सीएसएस कैडर में पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इसके चलते अनेक अधिकारियों की पदोन्नति पर तलवार लटक गई है। अधिकारियों को अगला ग्रेड मिलने में अनावश्यक तौर पर देरी हो रही है। उन्हें न्यायोचित पदोन्नति से भी वंचित रखा जा रहा है। कई अधिकारी पिछले पांच छह वर्ष से उपलब्ध रिक्तियों पर पदोन्नति मिलने के पात्र हैं, लेकिन उन्हें अभी तक नियमित पदोन्नति नहीं दी गई है। गत वर्ष सीएसएस अधिकारियों के आंदोलन के बाद, डीओपीटी ने अदालती मामले के लंबित निर्णय तक के लिए कैडर में तदर्थ पदोन्नति देने का फैसला किया था। बाद में दोबारा से डीओपीटी ने पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित मामलों में लंबित निर्णय का हवाला देते हुए आगे की तदर्थ पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन


सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अक्तूबर, 2021 को जरनैल सिंह मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस मामले में अभी तक अंतिम निर्णय नहीं सुनाया गया है। सीएसएस में तदर्थ पदोन्नति के लिए अंतिम आदेश 258 दिन पहले जारी किया गया था। अब हर महीने पात्र अधिकारी अपनी न्यायोचित पदोन्नति लिए बिना ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्हें वित्तीय नुकसान हो रहा है। उनकी पेंशन तक प्रभावित हो रही है। केंद्रीय सचिवालय सेवा, केंद्र सरकार की नीतियों को तैयार करने से लेकर उनके क्रियान्वयन तक में अहम भूमिका निभाती है।

सीएसएस अधिकारी, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में मध्य एवं वरिष्ठ प्रबंधन स्तर के पदों पर तैनात हैं। कई मौकों पर प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों ने सीएसएस अधिकारियों की कड़ी मेहनत और संरक्षण के लिए उनकी प्रशंसा की है। इसके बावजूद इस सेवा के अधिकारियों को पदोन्नति से वंचित रखा जा रहा है। फोरम का कहना है कि अभी ट्विटर पर अभियान शुरु किया जा रहा है। इसके बाद भी उनकी समस्या हल नहीं हुई तो दूसरा सख्त कदम अख्तियार किया जाएगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें