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रथ यात्रा के समय को लेकर विवाद: पुरी मंदिर प्रशासन ने खारिज किया इस्कॉन का दावा, कहा- भक्तों को कर रहे गुमराह

Wed, 15 Jul 2026 09:29 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, भुवनेश्वर।

सार

श्री पुरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने इस्कॉन के इस दावे को खारिज किया कि विदेशों में किसी भी समय रथ यात्रा आयोजित करना शास्त्रसम्मत है। एसजेटीए ने आरोप लगाया कि इस्कॉन भक्तों को गुमराह कर रहा है।
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जगन्नाथ पुरी मंदिर - फोटो : ani
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विस्तार
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पुरी जगन्नाथ मंदिर की एक समिति ने इस्कॉन के इस दावे को खारिज कर दिया कि मनचाहे दिनों पर रथ यात्रा निकालना धर्मग्रंथों के अनुसार है। इसके साथ ही जोर देकर कहा कि यह दुनिया भर के भक्तों को गुमराह करने का प्रयास है।

क्या है पूरा मामला? 

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दरअसल, भारत के बाहर भगवान जगन्नाथ से संबंधित रथ यात्रा और अन्य त्योहारों के असमय आयोजन को लेकर इस्कॉन और पुरी मंदिर प्रशासन के बीच विवाद चल रहा है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने मंगलवार को एक बयान में कहा, '12 जुलाई 2026 को मीडिया में प्रसारित इस्कॉन राष्ट्रीय संचार कार्यालय, नई दिल्ली की प्रेस विज्ञप्ति में झूठे बयान शामिल हैं। इसका उद्देश्य श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के असमय आयोजन के संबंध में जनता को गुमराह करने के इरादे से आरोप लगाना है।'

एसजेटीए ने क्या कहा? 
एसजेटीए ने कहा, 'आईएसकेकॉन के रथ यात्रा उत्सव पूरी तरह से वैध हैं और शास्त्रों के पूर्णतया अनुरूप हैं, यह दावा सरासर झूठ है।' पीटीआई द्वारा फोन पर संपर्क किए जाने पर, इस्कॉन के संचार के देश निदेशक और राष्ट्रीय प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंदा दास ने एसजेटीए के विचारों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

बैठक में क्या हुआ? 

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उन्होंने कहा, 'एसजेटीए का बयान देखे बिना टिप्पणी करना मुश्किल है।' एसजेटीए और इस्कॉन के विद्वानों ने 20 मार्च, 2025 को भुवनेश्वर में एक बैठक आयोजित की। एसजेटीए ने बताया कि उस बैठक में, शास्त्रों और कुछ अन्य आधारों पर भरोसा करते हुए, इस्कॉन के विद्वानों ने वर्ष भर विभिन्न तिथियों पर भारत के बाहर रथ यात्रा के आयोजन को उचित ठहराने का प्रयास किया। हालांकि, प्रामाणिक शास्त्रों और पुराणों का हवाला देते हुए मंदिर के विद्वानों ने उनके इस प्रयास को खारिज कर दिया।

क्या आरोप लगाया? 
मंदिर अधिकारियों ने इस्कॉन पर यह आरोप भी लगाया कि वह यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है कि पुरी के नाममात्र के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने रथ यात्रा के असमय आयोजन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मंजूरी दे दी है। बयान में कहा गया है, 'यह गजपति महाराजा की सत्यनिष्ठा और आचरण पर कलंक लगाने वाला एक जानबूझकर और शरारतपूर्ण बयान है।'

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