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Dispute: बोम्मई ने महाराष्ट्र के प्रस्ताव को बताया गैर-जिम्मेदाराना; बावनकुले बोले- एक इंच जमीन नहीं देंगे

Tue, 27 Dec 2022 10:35 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू/ मुंबई

सार

बोम्मई ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, कर्नाटक अपने रुख पर दृढ़ और स्पष्ट है कि वह एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सीमा के दूसरी तरफ के कन्नड़ भाषियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज ने मंगलवार को एक बार भी अंतरराज्यीय सीमा विवाद का मुद्दा उछाल दिया। बोम्मई ने सीमा मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानमंडल के प्रस्ताव को गैर जिम्मेदाराना और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की एक इंच जमीन भी नहीं दी जाएगी। 
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उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने का भरोसा जताते हुए कहा, हम महाराष्ट्र के प्रस्ताव की कड़ी निंदा करते हैं। राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 को आए हुए काफी समय हो गया है। दोनों तरफ के लोग शांति से रह रहे हैं। महाराष्ट्र में वहां की राजनीति के लिए ऐसे बयान देने और प्रस्ताव लाने का चलन है। 

बोम्मई ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, कर्नाटक अपने रुख पर दृढ़ और स्पष्ट है कि वह एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सीमा के दूसरी तरफ के कन्नड़ भाषियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा, हमारे और उनके प्रस्ताव के बीच अंतर देखें। हम कह रहे हैं कि हम अपनी जमीन नहीं दें, जबकि वे हमारी जमीन लेना चाहते हैं। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो ऐसी बातों का कोई मतलब नहीं है। हमन न्याय मिलने को लेकर आश्वस्त हैं, क्योंकि हमारा रुख संवैधानिक और कानूनी दोनों है। 
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महाराष्ट्र विधानमंडल ने कर्नाटक के 865 मराठी भाषी गांवों को राज्य में शामिल करने के लिए मंगलवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया मुख्यमंत्री एकनाथ शिंद ने महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में यह प्रस्ताव पेश किया। इसमें कहा गया कि कर्नाटक विधानमंडल ने जानबूझकर सीमा विवाद को हवा देने के लिए इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित किया था और कर्नाटक के रुख की निंदा की गई। इससे पहले बीते सप्ताह कर्नाटक की विधानसभा ने भी राज्य की सीमा को लेकर सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें राज्य के हितों की रक्षा करने और अपने पड़ोसियों को एक इंच भी जमीन न देने का संकल्प लिया गया था। 

महाराष्ट्र के पास इस तरह का प्रस्ताव लाने का अधिकार नहीं : सिद्धारमैया
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, महाराष्ट्र का इस तरह का प्रस्ताव लाने का कोई अधिकार नहीं है। इसकी कोई उपयोगिता नहीं है, क्योंकि सीमा मुद्दे पर महाजन आयोग की रिपोर्ट अंतिम है। महाराष्ट्र पर राजनीति के लिए बार-बार सीमा मुद्दे को तूल देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया मामला विचारणीय नहीं है। 

पड़ोसी राज्य को एक भी गांव नहीं दिया जाएगा : शिवकुमार
कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने भी महाराष्ट्र विधानसभा में पारित, कर्नाटक के मराठी भाषी गांवों को शामिल करने के प्रस्ताव की निंदा की और कहा कि पड़ोसी राज्य को एक भी गांव नहीं दिया जाएगा। शिवकुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर पूरा कर्नाटक एकजुट है और महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव की कड़ी निंदा करता है।

पिछले कुछ हफ्तों में तेज हुआ विवाद
बेलगावी में तनावपूर्ण माहौल के बीच पिछले कुछ हफ्तों में सीमा विवाद तेज हो गया है। हालिया समय में दोनों राज्यों के नेताओं की बयानबाजी बढ़ने के साथ दोनों ओर वाहनों को निशाना बनाया गया, और कन्नड़ तथा मराठी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।

भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद सीमा का मुद्दा 1957 का है। महाराष्ट्र बेलगावी पर दावा करता है जो तत्कालीन ‘बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा’ था, क्योंकि यहां अच्छी खासी मराठी भाषी आबादी है। महाराष्ट्र ने 800 से अधिक मराठी भाषी गांवों पर भी दावा किया है जो वर्तमान में कर्नाटक का हिस्सा हैं।
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कर्नाटक को नहीं दी जाएगी एक इंच भी जमीन : बावनकुले
वहीं, दूसरी ओर, भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, सीमा विवाद पर विधानमंडल द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने से पूरा राज्य खुश है और उन्हें भरोसा है कि कर्नाटक को कोई भूमि नहीं दी जाएगी। इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानमंडल के दोनों सदनों में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया है कि सीमावर्ती इलाके में 865 मराठी भाषी गांवों को महाराष्ट्र में शामिल करने के लिए राज्य कानूनी उपाय का सहारा लेगी। ये गांव फिलहाल कर्नाटक का हिस्सा हैं। बावनकुले ने कहा, पूरे महाराष्ट्र ने शिंदे-फडणवीस सरकार द्वारा लाये गये प्रस्ताव का समर्थन किया है और खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि सरकार एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेगी।

कर्नाटक में स्थित विवादित क्षेत्र का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहने तक इसे केंद्र शासित क्षेत्र घोषित करने की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे की मांग पर बावनकुले ने कहा कि विपक्षी नेता बखूबी जानते हैं कि यह व्यवहार्य नहीं है और उन्हें इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
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