गर्भ में विकसित हो रहा भ्रूण किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित तो नहीं है, इसकी जांच के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में 20 सेंटर खोलने की तैयारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की मदद से इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) सेंटर की शुरुआत करेगा।
इन सेंटर में हीमोफिलिया सहित दूसरी गंभीर बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। हीमोफिलिया फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे।
मंत्रालय की संयुक्त सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से 20 जेनेटिक लैब की शुरुआत की जा रही है। लैब में प्री-नेटल जांच कर गर्भ में पल रहे भ्रूण के अंदर की बीमारी का पता लगाया जा सकेगा।
जांच कर हीमोफिलिया, थैलेसिमिया और सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारियों का पता चल सकेगा। बीमारी का पता लगने पर गर्भ में ही भ्रूण का इलाज किया जा सकता है। जेनेटिक लैब उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ सहित कुछ अन्य राज्यों में खोलने की तैयारी है।
कार्यक्रम में मौजूद नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र से सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि वह सरकार से मांग करेंगी कि हीमोफिलिया, थैलेसिमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष प्रमाण-पत्र जारी किया जाए ताकि उन्हें कुछ मदद मिल पाए। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वास्थ्य मंत्रालय को इस संबंध में पत्र लिखेंगी।