संसद की बाधा पार करने के बाद अब जीएसटी की परीक्षा राज्यों की विधानसभाओं में होनी है। लोकसभा से पारित होने के बाद 5 अप्रैल को जीएसटी से जुड़े बिलों पर राज्यसभा में चर्चा होगी। सरकार को उम्मीद है कि यहां भी इन बिलों को पारित होने में कठिनाई नहीं आएगी। हालांकि सरकार के सामने असल चुनौती राज्य विधानसभाओं से जीएसटी बिल को मंजूरी दिलाना है। सभी राज्य विधानसभाओं से जीएसटी से जुड़े 1 बिल को पारित होना है।
जीएसटी लागू होने की समय सीमा 15 सितंबर है, लेकिन सरकार 1 जुलाई को इसे हर हाल में लागू करना चाहती है। मगर सरकार की इस इच्छा को पूरा करने के लिए राज्य विधानसभाओं का विशेष सत्र बुलाना जरूरी है। संसद की तरह विधानसभाओं के सत्र भी चल रहे हैं और कुछ के संपन्न भी हो चुके हैं।
संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि बुधवार को राज्य सभा में जीएसटी से जुड़े बिलों के पारित होने के बाद राज्यों की विधानसभाओं से बिल पर मुहर जरूरी है। उन्होंने कहा कि समय पर जीएसटी लागू हो सके इसके लिए विधानसभाओं का विशेष सत्र बुलाना जरूरी है। जीएसटी को सदी की सबसे बड़ी उपलब्धि करार देते हुए अनंत कुमार ने कहा कि देश की जनता अब एक समान को एक ही दाम पर कहीं से भी खरीद सकती है। कुमार ने कहा कि जीएसटी पर राज्यसभा में 5 अप्रैल को चर्चा के बाद लोकसभा में 6 अप्रैल को कर सुधार संशोधन विधेयक पर चर्चा होगी।