नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा को सार्वजनिक वाहनों को सीएनजी में तब्दील न करने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। आदेश की अनदेखी से नाराज प्रधान पीठ ने राज्यों को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने शीघ्र ही इस पर अमल नहीं किया तो एनसीआर में उनके वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। दोनों राज्यों ने आदेश के बावजूद अपने डीजल वाहनों को न तो अब तक सीएनजी में बदला है और न ही इसका खाका ट्रिब्युनल में पेश किया है। मामले पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने वायु प्रदूषण मामले पर सुनवाई की। पीठ ने इस मामले में पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेग्युलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) के वरिष्ठ अधिकारी को भी अगली सुनवाई में तलब किया है। राज्यों की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कहा था कि उन्होंने पीएनजीआरबी को आंकड़े दे दिए हैं, वे उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं। इस दलील के बाद पीठ ने राज्यों की ओर से पेश वकीलों से कहा कि हमें कहानियां मत सुनाइये, हम इसमें इच्छुक नहीं हैं। अगर हमारे आदेश का पालन नहीं हुआ तो इसका खामियाजा आप लोगों को भुगतना होगा। आपको यदि कोई दिक्कत थी तो हमारे पास आना चाहिए था।
एनजीटी ने राज्यों से मांगी थी सीएनजी आपूर्ति वाले शहरों की जानकारी
एनजीटी ने हाल ही में यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली से कहा था कि वे हलफनामा दाखिल कर उन शहरों की जानकारी दें, जो सीएनजी आपूर्ति से जुड़े हुए हैं या फिर जिन शहरों में सीएनजी आपूर्ति प्रस्तावित है। गत वर्ष एनजीटी ने 10 वर्ष से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों को राहत देने से मना करते हुए हरियाणा और यूपी से पूछा था कि उनके यहां सीएनजी सप्लाई की क्या संभावना है, ट्रिब्युनल को जल्द बताएं।