एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट को खारिज करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि राफेल की कीमतों पर असहमति जताने वाले अधिकारी ने ही इस सौदे पर कैबिनेट को भेजे गए नोट पर हस्ताक्षर किए थे। इसी आधार पर कैबिनेट ने करार को मंजूरी थी। उन्होंने इस दावे को भी गलत करार दिया कि उक्त अधिकारी को छुट्टी पर भेज दिया गया।
रिपोर्ट में कहा गया था कि राफेल सौदे के बारे में फ्रांस से वार्ता करने वाली समिति के सदस्य रहे संयुक्त सचिव और खरीद प्रबंधक राजीव वर्मा ने राफेल की बेंचमार्क कीमत को लेकर सवाल उठाया था और लिखित असहमति दर्ज कराई थी। हालांकि बाद में महानिदेशक खरीद ने असहमति को खारिज कर दिया था। रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी सौदे पर सभी संबंधित अधिकारियों की राय दर्ज की जाती है और बाद में सामूहिक निर्णय लिया जाता है।
अधिकारी ने अपनी टिप्पणी भले ही लिखी हो लेकिन कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे गए नोट पर भी इसी अधिकारी ने हस्ताक्षर किए थे। अधिकारी को छुट्टी पर भेजने पर उन्होंने कहा कि अधिकारी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण के लिए विदेश गए थे। वहीं कांग्रेस के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मूल एजेंडा राफेल सौदे को रद्द कराना है।
वहीं आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राफेल सौदे में सरकार ने सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया है। साथ ही उन्होंने भी एक वरिष्ठ अधिकारी की असहमति संबंधी मीडिया रिपोर्ट को खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में कई तथ्यात्मक खामियां हैं।