विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में दिव्यांगजनों को अब लिखित परीक्षा में पर्सन विद डिसबिलिटीज 2018 के नियम के तहत सुविधाएं मिलेगी। केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई ) को पर्सन विद डिसबिलिटीज 2018 के तहत लिखने में अक्षम और नेत्रहीन छात्रों के लिए योग्यता के आधार पर सहायक देने का निर्देश दिया है। यदि लिखित परीक्षा के दिन तय सहायक उपलब्ध नहीं हो पाता है तो फिर दिव्यांग छात्र को दो सहायक मुहैया करवाने होंगे।
यूजीसी सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से कुलपतियों का पत्र लिखकर पर्सन विद डिसबिलिटीज 2018 के दिशा-निर्देश को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है। इससे पहले पर्सन विद डिसबिलिटीज 2013 के दिशा-निर्देश लागू थे। हालांकि उक्त छात्रों को पर्सन विद डिसबिलिटीज 2018 का लाभ लेने से पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन या सरकारी चिकित्सा केंद्र से सत्यापित सर्टिफिकेट देना जरूरी है।
सहायक की शैक्षिक योग्यता की भी होगी परख
दिव्यांगजन को अपना सहायक लाने के लिए परीक्षा अधीक्षक से अनुमति लेनी होगी। लिखित परीक्षा में उपलब्ध या मुहैया करवाया जाने वाला सहायक उक्त परीक्षा लिखने के योग्य होना चाहिए। सहायक की शैक्षिक योग्यता भी जांची जाएगी। जिस कक्षा की परीक्षा में सहायक सवालों के जवाब लिखेगा, उसकी जानकारी उसे होनी चाहिए। यदि छात्र अपना सहायक लेकर आता है तो उसकी शैक्षिक योग्यता उक्त परीक्षा से अधिक और कम नहीं होनी चाहिए। छात्र चाहे तो सहायक बदल सकता है। भाषा (लैंग्वेज) परीक्षा में एक से अधिक सहायक भी छात्र को मिल सकते हैं। छात्र ब्रेल, कंप्यूटर, बड़े साइज की प्रिंटिंग या उत्तर की रिकार्डिंग भी करवा सकता है।
तीन की जगह चार घंटे का अतिरिक्त समय मिलेगा
नए नियमों के तहत दिव्यांगजन छात्रों को तीन की बजाय चार घंटे का समय दिया जा सकता है। तीन घंटे परीक्षा का समय और एक घंटे ऐसे छात्रों को अतिरिक्त देने का प्रावधान होगा। ऐसे छात्र अपने साथ बोलने वाला कैल्क्यूलेटर ला सकते हैं। दिव्यांगजन छात्रों को परीक्षा में ग्राउंड फ्लोर पर बिठाना होगा। उन्हें परीक्षा देने से पहले कक्षा, प्रोग्राम, वार्षिक या कंपार्टमेंट आदि की पूरी जानकारी लेने के बाद प्रश्न पत्र देना होगा। परीक्षा अधीक्षक की जिम्मेदारी होगी वे उनके लिए पानी, बैठने से लेकर अन्य सुविधाओं को पहले से जांचा जाए।