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ऋण एप का गंदा धंधा: कर्ज के जाल में फंसा जिंदगियां उजाड़ रहीं अवैध चीनी कंपनियां, चीन-हांगकांग में मास्टरमाइंड

Mon, 19 Sep 2022 06:07 AM IST
देव कश्यप मनीष शर्मा, अमर उजाला रिसर्च डेस्क।

सार

अवैध चीनी कंपनियों ने महामारी में आर्थिक आपदा को बनाया ठगी का अवसर। महज एक साल में देशभर में फैले 1100 अवैध एप। क्रिप्टोकरेंसी और हवाला कारोबार में लिप्त हैं जालसाज। ईडी के छापें में काली कमाई के नेटवर्क का हुआ भंडाफोड़।
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ऋण एप (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अवैध कर्ज के जाल में फंसे कुछ लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई। बीते दो साल में तत्काल ऋण देने वाले बेलगाम एप के वसूली एजेंटों ने विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित कर कई भारतीयों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया। अवैध कर्ज के जाल में फंसे अमित और सुधाकर की कहानी...
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केस-1 : जान-सम्मान पर भारी पड़ गया 40,000 का कर्ज
  • इंदौर : बीते माह 23 तारीख को अमित यादव (35) ने पत्नी और दो बच्चों समेत जहर पीकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में लिखा था...एक फकीर इंसान, जो सम्मान बचाने के लिए जान दे रहा है।
  • मौत की वजह : चीनी ऋण एप।
  • दरअसल, अमित ने पांच महीने पहले कई एप से 40,000 का कर्ज लिया था, जिसे चुका नहीं पाए।

केस-2 : कर्ज चुकाने के बाद भी खत्म करनी पड़ी जिंदगी
  • तेलंगाना : 19 जुलाई को के वाई सुधाकर (33) ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
  • मौत की वजह : गोल्डन रुपी एप।
  • सुधाकर ने 5,000 का कर्ज लिया था। उसे चुका भी दिया। फिर भी रिकवरी एजेंट अज्ञात नंबर से पत्नी को लेकर अश्लील संदेश रिश्तेदारों तक भेजने लगे।
  • इनसे आजिज आकर सुधाकर ने जान दे दी।
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यह दर्दनाक कहानी सिर्फ अमित और सुधाकर की ही नहीं है। दरअसल, कोरोना महामारी में काम-धंधे चौपट होने और नौकरियां छूटने पर लोगों को घर-परिवार चलाने के लिए मजबूरन कर्ज लेना पड़ा। इसी मजबूरी को चीन के जालसाजों ने धंधा बना लिया। तत्काल कर्ज देने के लिए ढेरों मोबाइल एप भारतीय बाजार में उतार दिए, जो बिना किसी खास सत्यापन के महंगे ब्याज पर लोगों को कर्ज देने लगे।

लोग कब अपने फोन के जरिये बेहद निजी और संवेदनशील जानकारियां चीनी जालसाजों से साझा कर बैठे, उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। कर्ज नहीं चुका पाने या किस्त में देरी पर ये चीनी एप ब्लैकमेल कर लोगों को प्रताड़ित करने लगे। इसकी वजह से देशभर में पिछले दो साल में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
  • फरवरी, 2021 में देश में 81 विभिन्न एप स्टोर पर 600 से 1,100 अवैध एप मौजूद थे। गूगल ने हटाए 2,000 से ज्यादा लोन एप
  • 1,100 मोबाइल एप लोन, त्वरित ऋण जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • गूगल ने 2,000 से ज्यादा लोन एप हटाए। 600 एप भारत में ही संचालित।

पुलिस की सलाह... इन खतरनाक एप से बचें
रेज कैश, पीपी मनी, रूपीज मास्टर्स, कैश रे, मॉबीपॉकेट, पापा मनी, इनफिनिटी कैश, क्रेडिट मैंगो, क्रेडिट मार्वल, सीबी लोन, कैश एडवांस, एचडीबी लोन, कैश ट्री, रॉ लोन, अंडर प्रॉसेस, कैश लाइट, एटडी क्रेडिट, रूपी लैंड, कैश रूम, रूपी लोन, वेल क्रेडिट।
 

देश में चीनी एप ने बुना जाल: हांगकांग, दुबई, सिंगापुर, नेपाल और बांग्लादेश तक जुड़े तार

गुरुग्राम, नई दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू में फैला नेटवर्क
दो साल में हैदराबाद और बंगलूरू में दर्ज हुई विभिन्न एफआईआर के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। एजेंसी के मुताबिक, ज्यादातर एप के तार चीन से जुड़े मिले। इनमें से कई ने गुरुग्राम, नई दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू में वित्तीय तकनीक फर्म (फिनटेक) बना रखी हैं। दिखावटी निदेशक बनाकर यहां से संचालन हो रहा है। कर्ज का जाल फैलाने के लिए इन कंपनियों को हांगकांग जैसी जगहों से पैसा भेजा जाता है। सिंगापुर और दुबई के लोग भी शामिल पाए गए हैं।

दिल्ली : 100 शिकायतों के बाद हुआ भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, पहले निवेश एप घोटाला सामने आया था। अब लोगों से ज्यादा उगाही के लिए तत्काल ऋण एप का इस्तेमाल हो रहा है। हाल ही में पुलिस ने एक ऋण एप के खिलाफ मिली 100 से ज्यादा शिकायतों के बाद किए भंडाफोड़ में 23 लोगों को गिरफ्तार किया।
  • पुलिस उपायुक्त केपीएस मल्होत्रा के मुताबिक, अपराध में छह चीनी नागरिक लिप्त पाए गए। चीन में बैठे सहयोगियों के पास क्रिप्टोकरेंसी और हवाला सेे 500 करोड़ रुपये पहुंचाए गए थे।
  • महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि बीते दो सला में वहां से संचालित चीनी एप ने 160 करोड़ रुपये कमाए हैं।
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चीन और हांगकांग में मास्टरमाइंड

इस तरह की कई घटनाएं सामने आने के बाद पुलिस ने कई चीनी ठग और उनके भारतीय सहयोगियों को पकड़ा। पुलिस जांच में एप के जरिये तत्काल कर्ज देने वाली कंपनियों के तार सीधे चीन और हांगकांग से जुड़े मिले। इन्हें संचालित करने वाले मास्टरमाइंड क्रिप्टोकरेंसी और मनी लॉन्ड्रिंग में भी लिप्त हैं।

चुरा लेते हैं निजी जानकारी
दिल्ली पुलिस को साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर सैकड़ों शिकायतें मिलीं। इसमें पता चला कि कर्ज वसूली के नाम पर चीनी जालसाज लोगों के मोबाइल पर अश्लील वीडियो और तस्वीरें भेजकर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं।

ग्राहक से ले रहे इजाजत
  • लोकेशन 30%
  • कैमरा 30%
  • कॉन्टैक्ट लिस्ट 21%
  • फोन कॉल 11%
  • रिकॉर्ड ऑडियो 11%

ऐसे लगती है आपकी निजी जानकारियों में सेंध
  • कर्ज लेते समय ये एप ग्राहक से उनके लाइव फोटो के साथ आधार और पैन कार्ड अपलोड कराते हैं।
  • मोबाइल पर आया ओटीपी मांगते हैं। उसके फोन के कॉन्टेक्ट लिस्ट, लोकेशन, चैट, फोटो गैलरी और कैमरे तक पहुंच की इजाजत ले ली जाती है।
  • सारी सूचनाएं चीन और हांगकांग स्थित सर्वरों पर अपलोड कर दी जाती है।
  • देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे इनके कॉल सेंटर में बैठे रिकवरी एजेंट के पास ग्राहकों की ये सारी जानकारियां होती हैं।
  • वसूली लक्ष्य पूरा करने पर एजेंट को अच्छा खासा बोनस मिलता है।

ये चिंताएं...जिनका समाधान जरूरी
  • जानकारी एकत्र करने में बड़ी अपारदर्शिता। रिकवरी एजेंट लेनदार के कॉल डिटेल्स, फोटो और अन्य संवेदनशील जानकारियों का दुरुपयोग करते हैं।
  • कर्ज चुकाने के बाद ग्राहकों के पास डाटा डिलीट करने का विकल्प नहीं
  • कुछ एप अपने साझेदार बैंक और एनबीएफसी का खुलासा नहीं करते।

आरबीआई के नियम किए दरकिनार
  • भारत में आरबीआई से पंजीकृत बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) ही कर्ज दे सकती हैं। केंद्रीय बैंक ने जब इन चीनी एप को एनबीएफसी की मान्यता नहीं दी तो इन्होंने देश में ऐसी छोटी निष्क्रिय एनबीएफसी का रुख किया, जिनके पास सिर्फ साढ़े तीन से 11 करोड़ रुपये थे।
  • फिर इन एनबीएफसी और फिनटेक के बीच सौदे करा एफडीआई के रूप में पैसे मुहैया कराए गए। अलग से मर्चेंट आईडी और पेमेंट गेटवे बनाकर ऋण एप से पैसा बांटने का धंधा शुरू हुआ।
  • आरबीआई के नियमों के बाद भी इन एप ने हजारों ग्राहकों को दो से 20 हजार रुपये तक का कर्ज बिना केवाईसी के बांटना जारी रखा।

ईडी ने करोड़ाें रुपये जब्त किए
  • आरबीआई ने पीसी फाइनेंशियल सर्विसेज का पंजीयन निरस्त किया। इस कंपनी ने कैशबीन एप के जरिये 1,320 करोड़ रुपये कमाए थे। इसके अधिकांश निवेशक चीनी थे। ईडी ने इससे जुड़े मामले में अब तक 270 करोड़ की संपत्ति जब्त की है।
  • एजेंसी ने मैड एलिफेंट नेटवर्क टेक्नोलॉजी, एक्स10 फाइनेंशियल सर्विसेज, ट्रैक फाइन्ड, रेजरपे सॉफ्टवेयर लिमिटेड से जुड़े मामलों में 77.25 करोड़ रुपये जब्त किए। तीन सितंबर को ईडी ने कुछ अन्य कंपनियों के पास से 17 करोड़ रुपये जब्त किए थे।

बचने का सिर्फ एक ही विकल्प... साझा न करें जानकारी
आरबीआई इन एप से बचाव के लिए दिशानिर्देश जारी कर चुका है। बताया गया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या एप से अपनी केवाईसी जानकारी साझा न करें।
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