स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने कोरोना संक्रमण के साथ-साथ ब्लैक फंगस को लेकर भी डॉक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। इनके तहत बच्चों में ब्लैक फंगस के इलाज के लिए जांच रिपोर्ट आने तक का इंतजार नहीं किया जाए क्योंकि यह एक एमरजेंसी है।
इलाज के दौरान किडनी फंक्शन और इलोक्ट्रोलाइट्स की मॉनटरिंग की जानी चाहिए। यह फंगस संक्रमण है जो स्टेरॉयड के गलत या अधिक मात्रा में इस्तेमाल, कैंसर, अंग या स्टेम सेल के प्रत्यारोपण, डायबीटिज को उपयुक्त तरीके से नियंत्रित न करने या फिर लंबे समय तक आइसीयू में इलाज की वजह से होता है।
निर्देशों के अनुसार, जिन्हें एंफोटेरिसिन बी नहीं दिया जा सकता है उन्हें पोसाकोनाजोल दिया जाना चाहिए। 11 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इस दवा की खुराक को लेकर भी जानकारी दी है। संक्रमित या कोरोना से ठीक हुए मरीजों में ब्लैक फंगस इंफेक्शन का मामला अधिक देखा गया।
डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 रोगियों के उपचार में स्टेरॉयड का उपयोग फंगल संक्रमण का एक कारण हो सकता है। म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) गंभीर बीमारी है जिसकी वजह से नाक, कान और गले के अलावा शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान होता है।