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16वीं लोकसभा के अंतिम दिन सदन में भंग हुई भाषा की मर्यादा

Thu, 14 Feb 2019 06:02 AM IST
Gaurav Pandey हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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16वीं लोकसभा की अंतिम बैठक में सदन में भाषा की सारी मर्यादा भंग हो गई। ‘दलाल’, ‘दोगला’, ‘रेपिस्ट’, ‘माफिया डॉन’, ‘चोर’ आदि कुछ ऐसे शब्द थे, जिनके जरिये सदस्यों ने अपनी भड़ास निकाली। बुधवार को सदन में चिट फंड कंपनियों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए बिल पेश किया गया। इस दौरान माकपा और कांग्रेस ने जब एनडीए घटकों के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरा तो सदन की हालत मछली बाजार जैसी हो गई। 

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लोकसभा के अंतिम दिन खासतौर से टीएमसी के सांसदों ने सारी संसदीय मर्यादा ताक पर रख दी। हुआ यह कि निजी चिटफंड कंपनियों पर रोक लगाने वाले बिल पर चर्चा के दौरान टीएमसी सांसद अध्यक्ष के आसान के पास पहुंच कर नारेबाजी करने लगे। इसी बीच कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने शारदा चिट फंड मामले में केंद्र की कार्रवाई का समर्थन किया और कहा कि टीएमसी के आधे सांसदों को जेल में होना चाहिए था। माकपा के मोहम्मद सलीम ने कहा कि सभी पार्टियों में भ्रष्ट लोग हैं, मगर टीएमसी तो भ्रष्ट लोगों की पार्टी है।

इसके बाद टीएमसी सांसदों ने सलीम की सीट पर जाकर उनके खिलाफ लगातार अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। हालात जब ज्यादा बिगड़ने लगे तो माकपा के कई सांसदों ने सलीम को अपने घेरे में ले लिया। इस दौरान टीएमसी के सौगत राय ने अधीर रंजन को माफिया डॉन बताया तो दूसरे सांसदों ने उन्हें रेपिस्ट और मोहम्मद सलीम को दलाल कह दिया।

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धर्मेंद्र यादव-अश्विनी चौबे की नोकझोंक

शून्यकाल के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुए लाठी चार्ज पर जब केंद्र ने राज्य सरकार की भूमिका से इनकार किया, तो सपा सांसद धर्मेंद्र यादव उत्तेजित होकर संसदीय कार्यमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की सीट के करीब पहुंच गए और उनसे बहस करने लगे। इससे नाराज स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे अपना आपा खो बैठे और धर्मेंद्र यादव से उलझ गए।

तीन तलाक, चिट फंड, नागरिकता बिल लटके

सरकार लाख कोशिशों के बावजूद तीन तलाक, चिट फंड कंपनियों पर लगाम और नागरिकता संशोधन बिल को कानूनी जामा नहीं पहना सकी। हालांकि सरकार ने अंतिम दिन इन बिलों के लिए नए सिरे से कोशिश की। मगर राज्यसभा के पहले ही स्थगित हो जाने से इन बिलों के साथ ही 16 बिल कानून नहीं बन पाए। राज्यसभा में तो बुधवार को हंगामे के कारण अंतरिम बजट भी बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया।
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