इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) विधेयक-2022 का मसौदा तैयार किया है। मंत्रालय ने दो जनवरी 2023 तक इस पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। इस बीच, वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग निकाय आईटीआई ने आशंका जताई है कि निजी डेटा के संरक्षण के लिए प्रस्तावित विधेयक-2022 के तहत कंपनियों के लिए भारत में डेटा केंद्रों और डेटा प्रोसेसिंग में निवेश करना मुश्किल हो सकता है।
दिग्गज टेक कंपनियों गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, ट्विटर और एपल का प्रतिनिधित्व करने वाले निकाय का कहना है कि यह विधेयक भारत सरकार को महत्वपूर्ण नियंत्रण प्रदान करता है। इसमें सरकार के लिए कई तरह की छूट हैं, जिससे कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना आसान नहीं होगा।
आईटीआई के मुताबिक, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण के लिए मसौदा विधेयक में सरकार द्वारा अधिसूचित डेटा न्यासियों को कई अनुपालनों से छूट दी गई है। इनमें डेटा संग्रह के उद्देश्य के बारे में व्यक्ति को सूचित करने से संबंधित प्रावधान, बच्चों के डेटा का संग्रह, सार्वजनिक व्यवस्था के आसपास जोखिम मूल्यांकन और डेटा ऑडिटर की नियुक्ति शामिल हैं।
भारत के बाहर डेटा संग्रह की अनुमति का समर्थन
इस विधेयक में सरकार द्वारा अधिसूचित डेटा न्यासी को 'व्यक्तिगत डेटा के बारे में सूचना का अधिकार' के तहत डेटा मालिकों के साथ डेटा प्रोसेसिंग का विवरण साझा करने से छूट देने का प्रस्ताव है। हालांकि, उद्योग निकाय ने भारत के बाहर डेटा संग्रह करने की अनुमति जैसे बिंदुओं पर विधेयक का समर्थन किया है।
वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि सरकार को सिर्फ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने, आपात स्थिति, महामारी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों जैसी विशेष परिस्थितियों में ही छूट होगी।