प्रधानमंत्री ने बर्लिन में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'भारत में जितनी फास्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी है, उतना ही सस्ता है। यह बहुत से देशों के लिए अकल्पनीय है।' पीएम मोदी ने आगे एक डेटा भी शेयर किया। बोले, 'पिछले साल पूरी दुनिया में हुए रियलटाइम डिजिटल पेमेंट्स में से 40 फीसदी भागीदारी भारत की है।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बर्लिन में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत की उपलब्धियों के बारे में बताया। आंकड़ों के जरिए स्टार्टअप से लेकर डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में हुई तरक्की से भारतीय मूल के नागरिकों को रूबरू कराया। इस दौरान पीएम मोदी ने एक बात कही, जिसकी खूब चर्चा हो रही है।
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प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत में जितनी फास्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी है, उतना ही सस्ता है। यह बहुत से देशों के लिए अकल्पनीय है।' पीएम मोदी ने आगे एक डेटा भी शेयर किया। कहा, 'पिछले साल पूरी दुनिया में हुए रियलटाइम डिजिटल पेमेंट्स में से 40 फीसदी भागीदारी भारत की है। भारत में अब ट्रैवल करते समय कहीं आते-जाते समय जेब में कैश लेकर चलने की मजबूरी करीब-करीब खत्म हो चुकी है। दूर-सुदूर के गांव तक भी।'
ऐसे में सवाल उठने लगा कि क्या सच में डिजिटल के क्षेत्र में भारत ने इतनी तरक्की कर ली है? क्या प्रधानमंत्री मोदी के ये आंकड़े सच हैं? पीएम के दावों में कितनी सच्चाई है? भारत में कितने लोग इंटरनेट यूज करते हैं और यहां कितना सस्ता इंटरनेट है? आइए आंकड़ों के जरिए इसे समझते हैं...
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अब जानिए प्रधानमंत्री के दावे और उसकी हकीकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
इंटरनेट को लेकर: प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत में जितनी फास्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी है, उतना ही सस्ता है। यह बहुत से देशों के लिए अकल्पनीय है।'
दावे में कितनी सच्चाई है? : इंटरनेट को लेकर प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में दो दावे किए हैं। पहला यह कि भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी स्पीड फास्ट है और दूसरा यह कि यह कई देशों से सस्ता भी है। हमने इस दावे की पड़ताल की।
हमें टोनर डेन का एक आंकड़ा मिला। इसमें उन्होंने दुनियाभर के उन सभी देशों की सूची दे रखी है, जहां सबसे सस्ता इंटरनेट मिलता है। इस सूची में पहले नंबर पर यूक्रेन है। यहां एक एमबी इंटरनेट के लिए लोगों को 0.04 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। मालदोवा में 0.27 और रूस में 0.32 डॉलर प्रति एमबी खर्च करने पड़ते हैं। भारत में एक एमबी के लिए 0.60 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। मतलब साफ है कि भारत उन देशों में शुमार है, जहां सबसे सस्ता इंटरनेट मिलता है।
इसके बाद सबसे तेज इंटरनेट स्पीड के आंकड़ों पर नजर डाला गया। स्पीडटेस्ट डॉट नेट की रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल स्पीड के मामले में भारत दुनिया के 120वें नंबर पर है। वहीं ब्रॉडबैंड के मामले में भारत का स्थान 72वां है। मतलब स्पीड के मामले में अभी भारत काफी पीछे है।
डिजिटल पेमेंट : प्रधानमंत्री ने कहा, पिछले साल पूरी दुनिया में हुए रियलटाइम डिजिटल पेमेंट्स में से 40 फीसदी भागीदारी भारत की है। भारत में अब ट्रैवल करते समय कहीं आते-जाते समय जेब में कैश लेकर चलने की मजबूरी करीब-करीब खत्म हो चुकी है। दूर-सुदूर के गांव तक भी।'
कितना सच है दावा? : स्टेटिस्टा के आंकड़ों के अनुसार रियल टाइम डिजिटल पेमेंट के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है। मतलब यह सही है कि भारत में सबसे ज्यादा लोग डिजिटल पेमेंट करने लगे हैं। दूसरे नंबर पर चीन और तीसरे पर साउथ कोरिया है। भारत में 2019 से लेकर 2021 तक इसमें 90% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। मार्केट के जानकारों का कहना है कि वर्ष 2026 तक एक ट्रिलियन से ज्यादा लोग भारत में डिजिटल पेमेंट करने लगेंगे। अकेले 2021 में 44 बिलियन लोगों ने डिजिटल पेमेंट किया।