भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि 2026-27 को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी का वर्ष घोषित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने माना कि सेना इस क्षेत्र में अभी पूरी तरह तैयार नहीं है और तेजी से सुधार की जरूरत है।
भारतीय सेना अब भविष्य की लड़ाइयों को डिजिटल रूप से और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में काम कर रही है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को बताया कि वर्ष 2026-27 को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी का वर्ष घोषित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें सेना को तेजी से काम करने की जरूरत है क्योंकि अभी इसकी पूरी तैयारी नहीं है।
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जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेना ने वर्ष 2024-25 को टेक्नोलॉजी अब्जॉर्प्शन का वर्ष घोषित किया है और अब डाटा नेटवर्किंग पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सेना के पास बैटलफील्ड सर्विलांस सिस्टम, ओपन सोर्स एनालिटिक्स और प्रेडिक्टिव एनालिसिस जैसे आधुनिक साधन हैं, लेकिन इन सभी को एकीकृत करने की प्रक्रिया अभी जारी है।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख
सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर 1.0 ने हमें कई सबक सिखाए और हम विजेता बनकर उभरे। उन्होंने बताया कि भविष्य के किसी भी ऑपरेशन, चाहे वह सिंदूर 2.0 हो या कोई युद्ध, में इन सबकों को समन्वयित तरीके से लागू करना जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
भारत ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद भारत ने कई काउंटर ऑपरेशन किए। 10 मई की शाम दोनों देशों के बीच समझौते के बाद सैन्य कार्रवाई को रोक दिया गया था।
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर सेना प्रमुख की टिप्पणी
जनरल द्विवेदी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर अब सेना के लिए रिएक्टिव आर्मर यानी सुरक्षा कवच बन चुकी है। उन्होंने बताया कि आने वाले सभी सैन्य प्लेटफॉर्म में इलेक्ट्रॉनिक प्रोटेक्शन सिस्टम को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा प्रणाली अब नेटवर्क-संचालित और डाटा-केंद्रित संरचना की ओर तेजी से बढ़ रही है।