सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रेस और पुस्तकों के पंजीकरण (पीआरबी) कानून, 1867 में संशोधन के तहत यह प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस कदम का पुरजोर तरीके से विरोध हुआ था। इसके बाद अब इस प्रस्ताव को स्थगित किया जा सकता है।
केंद्र सरकार डिजिटल मीडिया के पंजीकरण के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी कर रही है। इससे पहले सरकार ने अखबारों और पत्रिकाओं के पंजीकरण से संबंधित ब्रिटिशकालीन कानून के तहत डिजिटल मीडिया के पंजीकरण का प्रस्ताव भी तैयार किया था।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रेस और पुस्तकों के पंजीकरण (पीआरबी) कानून, 1867 में संशोधन के तहत यह प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस कदम का पुरजोर तरीके से विरोध हुआ था। इसके बाद अब इस प्रस्ताव को स्थगित किया जा सकता है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, डिजिटल मीडिया को औपनिवेशिक युग के कानून प्रेस एवं बुक्स रजिस्ट्रेशन (पीआरबी) के तहत पंजीकरण कराने से राहत मिल सकती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार पंजीकरण के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी में है।
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अधिकारी ने कहा कि हम प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं। हो सकता है कि संशोधित कानून के अंतिम मसौदे में डिजिटल मीडिया के पंजीकरण का मुद्दा शामिल न हो। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक कार्यक्रम में कहा था कि सरकार की मीडिया क्षेत्र में कामकाज को आसान बनाने के लिए पीआरबी अधिनियम में संशोधन करने की योजना है। लेकिन डिजिटल या प्रिंट मीडिया में नियंत्रण का मुद्दा सरकार संबंधित क्षेत्रों पर ही छोड़ देगी।