पुस्तकालयों की बंद अलमारी से किताबों की विरासत आम लोगों तक पहुंचाने का पीएम नरेंद्र मोदी का सपना जल्द पूरा होगा। नीति आयोग के सहयोग से संस्कृति मंत्रालय ने वन नेशन-वन डिजिटल लाइब्रेरी बनाई है। उपराष्ट्रपति रविवार को हर राज्य की लाइब्रेरी के डिजिटल रिकार्ड को लांच करेंगे। शुरुआत दिल्ली से हो रही है, इसमें दिल्ली के हर छोटे-बड़े पुस्तकालय की जानकारी पाठक को घर बैठे मिलेगी।
वन नेशन-वन डिजिटल लाइब्रेरी से पाठकों को किताबों से रूबरू होने के लिए इंडिया कल्चर पोर्टल पर लॉगइन करना होगा। इसकी शुरुआत सात लाइब्रेरी से की गई है, इसमें 700 दुर्लभ किताबें भी शामिल हैं। संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुग्धा सिन्हा ने बताया कि देशभर के छोटे-बड़े सभी पुस्तकालयों, उनकी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक किताबों की विरासत, पत्र, पांडुलिपियों को सहेजने और उसे आम लोगों तक पहुंचाने के मकसद से वन नेशन-वन डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की जा रही है। पहले चरण में केंद्र सरकार के सभी पुस्तकालयों की एक सूची बनाई गई है। दूसरे चरण में राज्यों की सरकारी लाइब्रेरी और तीसरे चरण में निजी और संस्थाओं की ओर से चलाई जाने वाली लाइब्रेरी को शामिल किया जाएगा। ब्यूरो
पूरी जानकारी घर बैठे पाएंगे पाठक
पुस्तकालयों की रैंकिंग के लिए तैयार किए 42 मापदंड
विश्वविद्यालयों की तर्ज पर केंद्र सरकार पुस्तकालयों की रैंकिंग शुरू करने जा रही है। इसमें 42 मापदंड तैयार किए गए हैं। इसमें पंचायतों के ग्रामीण पुस्तकालय, मोबाइल पुस्तकालय, जिला पुस्तकालय से लेकर राष्ट्रीय पुस्तकालय भाग ले सकेंगे। इस रैंकिंग के आधार पर पाठकों को पता चलेगा कि कौन सा पुस्तकालय की किस स्तर का है। इस रैंकिंग से इंफ्रास्ट्रक्चर, पाठकों, किताबों की संख्या समेत अन्य सुविधाओं की जानकारी आम लोगों को मिलेगी। रैंकिंग में जगह बनाने के लिए पुस्तकालय सुविधाओं में इजाफा करेंगे और आम लोगों को सीधे इसका लाभ मिलेगा।
पढ़िए क्या बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू
सभ्यताओं की खाई पाटने व ज्ञान को सुलभ बनाने के लिए डिजिटलीकरण बहुत जरूरी है। मुर्मू ने शनिवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से प्रगति मैदान में आयोजित दो दिवसीय ‘पुस्तकालय महोत्सव’ का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री के द़़ृष्टिकोण के अनुरूप एक राष्ट्रीय डिजिटल वर्चुअल लाइब्रेरी विकसित करने की तैयारी है, ताकि राष्ट्र को एकल डिजिटल लाइब्रेरी मिल सके। इस महोत्सव का उद्देश्य देश में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए देश में पुस्कालयों के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना होगा। इससे सभ्यताओं की खाई कम करने और ज्ञान को सुलभ बनाने में भी सहयोग मिलेगा। पुस्तकालय सभ्यताओं के बीच सेतु का काम करते हैं।