डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़े 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने मुंबई से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में 400 बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के जरिये बड़े लेनदेन का खुलासा हुआ है। चालकों और कर्मचारियों को निदेशक बनाकर कैसे चल रहा था यह बड़ा ठगी का खेल? जानिए रिपोर्ट में।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देशभर में चल रहे साइबर धोखाधड़ी व डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 30,000 करोड़ से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रविवार देर रात मुंबई से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से ईडी को उनका ट्रांजिट रिमांड मिल गया।
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इस नेटवर्क के खिलाफ 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 163 एफआईआर एवं 300 से अधिक साइबर धोखाधड़ी से जुड़ीं शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें कुल 417.49 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान है।
ईडी दोनों को गोवा के पणजी ले जाएगी, जहां मुख्य केस दर्ज है। ईडी ने गोवा में 9 जून, 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है। इसमें गोवा की एक महिला को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने 21 मई से 2 जून, 2025 के बीच 2.60 करोड़ रुपये सीक्रेट खाते में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था। ईडी ने इस मामले में जुलाई और 21 अगस्त को गोवा एवं मुंबई में छापे मारे थे। इस दौरान करीब 3.25 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई।
खेल: फर्जी कंपनियों में ड्राइवरों को बना दिया निदेशक
ईडी के मुताबिक, ठगी की रकम को 400 अलग-अलग बैंक खातों में डाला गया और फिर विदेशी मुद्रा में बदला गया। मनी ट्रेल से पता चला कि यह जालसाजी ट्रेडिंग, ट्रैवल, कमोडिटी और फॉरेक्स से जुड़ी फर्जी संस्थाओं के जरिये 27,850 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लेनदेन किए गए, जिसमें 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा थे। फर्जी कंपनियों में ड्राइवरों-कर्मचारियों को निदेशक बनाया गया था, जो एक कमरे के साधारण मकानों में रहते हैं।