एमएसएमई, बड़े व्यवसायों और चेरिटेबल ट्रस्टों के लिए एक निकाय डिजिलॉकर स्थापित किया जाएगा। इससे दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन संग्रहीत करने तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें विभिन्न प्राधिकरणों, विनियामकों, बैंकों और अन्य व्यावसायिक निकायों के साथ साझा करने में मदद मिलेगी। यानी अब दस्तावेज की हार्ड कॉपी हमेशा साथ रखने की जरूरत नहीं होगी।
यूपीआई लेनदेन में 76 और मूल्य में 91 प्रतिशत की वृद्धि
निफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) सबसे अधिक पसंदीदा भुगतान तरीकों में शामिल हो गया है। वर्ष 2022 में 125.94 लाख करोड़ रुपये यूपीआई लेनदेन के साथ इसमें 76 प्रतिशत और मूल्य में 91% की वृद्धि हुई है। सरकार डिजिटल पेमेंट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में 2137 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे सकती है। यह राशि पिछले वित्तवर्ष के 1,044 करोड़ के मुकाबले दोगुनी है। इस साल के लिए बजट आवंटन 1,500 करोड़ रुपये है। यह लगातार तीसरा साल है, जब इसके आवंटन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। डिजिटल पेमेंट के तहत आवंटित राशि आमतौर पर बैंकों को यूपीआई लेनदेन को बढ़ावा देने के बदले सब्सिडी के रूप में दी जाती है, ताकि बैंक इन पर कोई शुल्क न वसूलें।
आरबीआई और सरकारी बैंक भरेंगे देश का खजाना
जट में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकारी क्षेत्र के बैंकों से मिलने वाला लाभांश 17.3 प्रतिशत बढ़कर 48,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया है। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए संशोधित अनुमान 40,953.33 करोड़ रुपये रहा था। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमान 44.6 फीसदी कम है, क्योंकि पिछले साल के बजट में 73,948 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था। इसमें कमी की मुख्य वजह आरबीआई है, जिसने मई 2022 में केवल 30,307 करोड़ रुपये का लाभांश दिया था।
बैंकिंग क्षेत्र की शासन व्यवस्था में होगा सुधार
बैंक व्यवस्था में सुधार और निवेशक संरक्षण बढ़ाने के लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम, बैंकिंग कंपनी अधिनियम और भारतीय रिजर्ब बैंक अधिनियम में संशोधनों का प्रस्ताव है। कंपनी अधिनियम के तहत फील्ड कार्यालयों के साथ फाइल किए गए विभिन्न फॉर्मों के माध्यम से कंपनियों को त्वरित प्रत्युत्तर के लिए प्रोसेसिंग केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव है।
39,000 से अधिक प्रक्रियाएं कीं खत्म
वित्तीय क्षेत्र में अनुपालना को सरल बनाने, आसान करने और इसकी लागत को कम करने के लिए विनियामकों से व्यापक समीक्षा करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके लिए आम लोगों और विनियमित संस्थाओं से प्राप्त सुझावों पर विचार किया जाएगा। वहीं, व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 39,000 से अधिक अनुपालनों को कम किया गया है और 3400 से अधिक विधिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाया गया है।