पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोगतुई में सीबीआई हिरासत में मृत ललन शेख की मौत के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले की बंगाल पुलिस की सीआईडी शाखा द्वारा की जा रही जांच की निगरानी डीआईजी स्तर के अधिकारी करेंगे।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह निर्देश दिया। ललन शेख 10 लोगों के नरसंहार का मुख्य आरोपी था। उसकी सीबीआई हिरासत में मौत हो गई थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीआई की याचिका पर संबंधित पक्षकारों का हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। सीबीआई ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपने को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जय सेनगुप्ता ने निर्देश दिया कि सीआईडी का एक डीआईजी रैंक का अधिकारी जांच की निगरानी करेगा।
हाईकोर्ट ने मामले के पक्षकारों सीआईडी, सीबीआई और ललन शेख की पत्नी को पांच जनवरी तक केंद्रीय जांच एजेंसी की याचिका पर अपना जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। इसी दिन मामले की आगे सुनवाई होगी।
सीबीआई ने ललन की अप्राकृतिक मौत के मामले को पश्चिम बंगाल सीआईडी से वापस लेकर एनएचआरसी के महानिदेशक या खुद सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग करते हुए अदालत के समक्ष याचिका दायर की है।
ललन का शव 12 दिसंबर को रामपुरहाट में सीबीआई के अस्थाई कार्यालय के शौचालय में फांसी पर लटका मिला था। यह अस्थाई कार्यालय बागतुई हत्याकांड की जांच के लिए बनाया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो इस नरसंहार की जांच कर रही है। 21 मार्च को बीरभूम जिले के बागतुई में तृणमूल कांग्रेस के उप पंचायत प्रमुख भादू शेख की हत्या के बदला लेते हुए 10 लोगों को उनके घरों में जिंदा जला दिया गया था।
सीएम ममता बनर्जी ने सीबीआई हिरासत में मौत पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच राज्य के सीआईडी को सौंपी है। मामले में सीआईडी ने सीबीआई के 7 अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।