बिहार के राजगीर स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के प्रशिक्षण केंद्र में जवान पर गर्म पानी डालने वाले डीआईजी डीके त्रिपाठी का तबादला सीआरपीएफ के मणिपुर-नगालैंड सेक्टर में कर दिया गया है। वहां उन्हें स्वतंत्र कार्यभार नहीं सौंपा गया है, बल्कि आईजी के साथ अटैच किया है। अभी वे बिहार के मोकामाघाट ग्रुप सेंटर के डीआईजी थे। बोर्ड की ड्यूटी के चलते वे राजगीर आए हुए थे। वहां जीओ मेस में गर्म पानी वाली घटना हो गई। इस मामले में आरोपी के खिलाफ जीरो एफआईआर की बात भी सामने आ रही है।
बता दें कि सात जनवरी को 64 बटालियन के जवान अमोल खराट अटैच ड्यूटी के तहत राजगीर स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के प्रशिक्षण केंद्र पर कार्यरत थे। वहां परीक्षाएं संचालित हो रही थीं। इसके लिए जो बोर्ड बनाया गया था, उसमें बाहर से भी कई अधिकारी आए हुए थे। अमोल की ड्यूटी जीओ मैस में लगाई गई थी।
बोर्ड में आए एक डीआईजी जब मेस में पहुंचे, तो उन्होंने जवान से गर्म पानी लाने के लिए कहा था। उन्हें एक थर्मस में गर्म पानी दे दिया गया। जाहिर है कि थर्मस में तो पानी गर्म ही होगा। डीआईजी साहब इसी बात पर गुस्सा हो गए। उन्होंने जवान के ऊपर वह पानी फेंक दिया। इससे जवान का चेहरा, गर्दन और छाती जैसे अंग झुलस गए। हालांकि जवान ने जर्सी पहनकर रखी थी, लेकिन गर्म पानी ने फिर भी घाव कर दिया।
डीआईजी ने कथित तौर से जवान को अपने पास बुलाकर उस पर पानी फेंका था। इतना ही नहीं, उन्होंने सामने से उसकी जर्सी में भी गर्म पानी डाल दिया। सीआरपीएफ मुख्यालय के अधिकारियों ने हालांकि घटना तो सही बताया था, लेकिन उन्होंने घटना को थोड़ा मोड़ दे दिया। उनके मुताबिक, डीआईजी ने जब थर्मस खोलकर वह पानी पीया, तो उनका मुंह जल गया। इसी बात पर वे गुस्सा हो गए। उन्होंने अमोल खराट को बुलाया और वह पानी जांचने के लिए कहा। डीआईजी बोले, यह पानी पियो। वह जवान जब पानी पीने लगा, तो वह उसके ऊपर गिर गया। इसी चक्कर में अमोल खराट झुलस गया था।