सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निजी कंपनियों के आधार के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध ने कई क्षेत्रों की कंपनियों की परेशानी बढ़ा दी है। दूरसंचार, बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट जैसी सेवाएं देने वाली कंपनियां ग्राहकों का आधार के जरिये सत्यापन करने का पूरा सेटअप लगा चुकी हैं। ऐसे में कंपनियों को इस बात की चिता सता रही है कि पहले उन्होंने यह व्यवस्था बनाने में खर्च किया अब उन्हें वापस पुराना तरीका प्रयोग करना होगा, जो करीब 10 गुना ज्यादा खर्चीला होगा। साथ ही, सत्यापन और सेवा शुरू करने में आई तेजी में भी कमी आएगी।
उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने आधार अधिनियम की धारा 57 को रद्द कर दिया है, जिसके चलते अब आधार प्राधिकरण निजी कंपनियों के साथ डाटा साझा नहीं कर सकता। भारतीय सेल्यूलर ऑपरेटर एसोसिएशन (सीओएआई) का कहना है कि वह इस मामले में दूरसंचार मंत्रालय के निर्देश का इंतजार कर रहा है। हम सर्वोच्च अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन दूरसंचार कंपनियां पहले से ही वित्तीय संकट झेल रही हैं। अब इस फैसले का कंपनियों पर कितना असर पड़ेगा, इस पर गौर किया जा रहा है।
आधार के जरिये सुविधाजनक था भुगतान
एक मोबाइल वॉलेट कंपनी के प्रमुख ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा कि आधार के जरिये भुगतान सेवा सुविधाजनक और विश्वसनीय बन रही थी। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इसका फायदा मिलना शुरू हो गया था। बैंकिंग क्षेत्र में आधार के प्रयोग पर रोक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली निजी कंपनियों के लिए भारी झटका है। देखते हैं कि सरकार इसका क्या हल निकालती है, क्योंकि बैंकिंग क्षेत्र में सिर्फ सरकारी ही नहीं, बल्कि अब तो पोस्टल बैंक भी है, जिसकी पूरी व्यवस्था आधार पर टिकी है।
आरबीआई व विभाग के निर्देश का इंतजार
आधार के जरिये एक ग्राहक का सत्यापन करने में कंपनियों को 10-20 रुपये की लागत आती थी, जबकि दस्तावेज के जरिये सत्यापन करने में लागत 10 गुना बढ़ जाती है। साथ ही एक्टीवेशन की अवधि भी बढ़ जाती है, जो आधार के सत्यापन के चलते हाथों-हाथ शुरू हो जाता था। लेकिन अब आधार के प्रयोग पर रोक लगने से मोबाइल नंबर व बैंक खाता शुरू होने में थोड़ा वक्त लगेगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद आधार सत्यापन को बंद करने के लिए कंपनियां और बैंक अपनी नोडल एजेंसी आरबीआई और दूरसंचार विभाग के निर्देश का इंतजार कर रही हैं।
कानून में हो सकता है संशोधन : रविशंकर प्रसाद
सूचना-प्रौद्योगिकी एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि निजी कंपनियां फिर से आधार का इस्तेमाल विभिन्न स्तरों पर कर सकें, इसके लिए केंद्र सरकार कानून में बदलाव कर सकती है या सरकार इसके लिए कानून ला सकती है। प्रक्रिया लंबी है, इसलिए अभी वक्त लगेगा।
कानून मंत्री ने कहा कि सरकार नया कानून लाकर संशोधन कर सकती है या फिर हर मंत्रालय को इसके लिए अपने कानून में बदलाव करना होगा। मसलन सिम कार्ड की प्रक्रिया में आधार के इस्तेमाल के लिए टेलीग्राफ अधिनियम में संशोधन करना होगा। संशोधन की इस प्रक्रिया को संसद की मंजूरी की जरूरत होगी, फिलहाल इसमें लंबा वक्त लगेगा।