एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति के ठहरे हुए पानी में कंकड़ फेंककर हलचल पैदा कर दी थी। अब उस हलचल को वह अपने कंकड़ फेंकने के अंदाज में समेट रहे हैं। राजनीति के ककहरे में माहिर छगन भुजबल खुलकर नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर पवार साहब ने घोषणा क्यों की थी और क्यों इस्तीफा वापस लेने का ऐलान कर रहे हैं। लेकिन महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और राजनीति के एक और दिग्गज का कहना है कि शरद पवार ने एनसीपी को तोड़ने का सपना देखने वालों को खुली चुनौती दे दी है। कोई कह रहा है कि शरद पवार ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को राजनीति का पहाड़ा पढ़ाया है।
शरद पवार ने दे दी है चुनौती, पार्टी तोड़कर दिखाओ?
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रकांत बच्चू पाटील ने कहा कि शरद पवार ने एक संदेश दिया है। शरद पवार ने बताया कि वह एनसीपी में प्रभाव वाले नेता हैं। उनकी पार्टी को टूट का कोई खतरा नहीं है। पाटील ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि एनसीपी के कुछ नेताओं और विधायकों के भाजपा में शामिल होने की चर्चा थी। उनके भतीजे अजीत पवार का भी नाम लिया जा रहा था। चंद्रकांत पाटील कहते हैं कि शरद पवार ने इस पर लगाम लगा दिया है। क्या शरद पवार ने अपनी पार्टी तोड़ने वालों को चुनौती दे दी है, इस सवाल पर पाटील कहते हैं कि आप ऐसा कह सकते हैं।
कौन तोड़ रहा था शरद पवार की एनसीपी?
अजीत पवार एनसीपी के वरिष्ठ नेता और शरद पवार के भतीजे हैं। 23 नवंबर 2019 को शरद पवार की मंशा के विपरीत कुछ बागियों के साथ अजीत पवार ने भाजपा के पाले में खड़े होकर उप मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी। देवेन्द्र फड़णवीस मुख्यमंत्री बने थे। शरद पवार ने अपनी शैली में भतीजे को संदेश दिया और तीन दिन बाद 26 नवंबर को अजीत पवार फिर एनसीपी में लौटकर अनुशासित सिपाही हो गए थे। जब से महाराष्ट्र में देवेन्द्र फड़णवीस के नेतृत्व में दिल्ली के भाजपा के रणनीतिकारों ने पिछले साल उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार गिराई है, तब से कई बार अजीत पवार के फिर पाला बदलने की चर्चाएं उठ रही हैं।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह अपनी टिप्पणियों में कई बार बता चुके हैं कि एनसीपी में झगड़ा बढ़ रहा है। भाजपा के रणनीतिकार शरद पवार के घर में चुनौती दे रहे हैं। प्रदीप सिंह का इशारा अजीत पवार को शरद पवार से अलग करने की तरफ है। महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले बीडी चतुर्वेदी कहते हैं कि दिल्ली में भाजपा के रणनीतिकार हैं। वह विपक्ष के राजनीतिक दलों में बगावत कराते रहे हैं। यही संभावना एनसीपी को लेकर भी कही जा रही थी। अब आइए सामना में छपे अंश पर चलते हैं। सामना में पहले छप चुका है कि शरद पवार का इस्तीफा देना पहले से तय है। एनसीपी के एक बड़े नेता का इस्तीफा देने वाले दिन ही ये दावा किया गया था कि थोड़ा रुकिए। पवार साहब मान जाएंगे। हुआ भी वही। दूसरा बड़ा संकेत उद्धव ठाकरे और कांग्रेस की तरफ से है। न तो उद्धव ठाकरे ने कोई बड़ी प्रतिक्रिया दी और न कांग्रेस ने। कांग्रेस के नेता नाना पटोले भी इस दौरान बहुत संभलकर चले।
शरद पवार का गेम प्लान क्या है?
कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव कहते हैं कि वह 80 के दशक से शरद पवार की राजनीति को देख रहे हैं। पवार को समझना बहुत आसान नहीं है। शरद पवार ने अपने भतीजे अजीत पवार को लेकर कहा कि उन्हें बदनाम किया जा रहा है। उनकी छवि बिगाड़ी जा रही है। वह पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले। एनसीपी अटूट है। उन्होंने अजीत पवार के 26 नवंबर 2019 में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने और वापस आने के घटनाक्रम में भी अपनी पत्नी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। माना जाता है कि इसके मर्म को दो नेता अच्छी तरह समझते हैं। वह हैं प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल। सुप्रिया सुले को पूरा एहसास है। धनंजय मुंडे इस समय फिर शरद पवार की शरण में हैं। अर्थ साफ है कि शरद पवार ने अजीत पवार को बिना सेना का सेनापति साबित कर दिया है। राजनीति की भाषा में कहें तो बता दिया है कि एनसीपी के अभी एक मात्र नेता शरद पवार ही हैं। जो एनसीपी में बगावत का सपना देख रहे हैं, उन्हें संभल जाना चाहिए।
पवार ने राजनीतिक खेल के लिए यह समय क्यों चुना?
उच्चतम न्यायालय में शिवसेना से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके साथ बागी हुए विधायकों का मुकदमा चल रहा है। शिंदे मंत्रिमंडल में कृषिमंत्री अब्दुल सत्तार कहते हैं कि वह भी उन विधायकों में हैं, जिनपर अयोग्यता की तलवार लटकी है। सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा उसे स्वीकार करेंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हो चुकी है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। फैसला कभी भी सुनाया जा सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले उच्चतम न्यायालय से एक तूफान आने का अंदेशा महसूस कर रहे हैं। ऐसा हुआ तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए झटका होगा। भाजपा के केन्द्र में बैठे रणनीतिकारों के लिए फिलहाल संकट और सरकार बचाने की चुनौती है।
महाराष्ट्र के मंत्रालय में अच्छी पकड़ रखने वाले सूत्र का कहना है कि देवेन्द्र फड़णवीस और एकनाथ शिंदे के बीच में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। बताते हैं पिछले दिनों एकनाथ शिंदे ने तमाम महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारियों का स्थानांतरण किया और इसकी देवेन्द्र फड़णवीस को भनक तक नहीं लग पाई। महाराष्ट्र के भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले को आगे की चुनौतियां पता है। शिवसेना के संजय राउत ने भी समय रहते चेतावनी दे दी और कहा कि अगले कुछ दिनों में एकनाथ शिंदे-भाजपा सरकार गिर जाएगी। इसके साथ-साथ महाराष्ट्र के नागपुर समेत कुछ शहरों में देवेन्द्र फड़णवीस के मुख्यमंत्री बनने और अजीत पवार के उप मुख्यमंत्री बनने के पोस्टर लग रहे हैं। माना जा रहा है कि परिस्थिति को देखकर शरद पवार ने इस समय को चुना।
'भाजपा ने दो बार पवार को दिया झटका, जवाब तो देना बनता है'
कल्याण पाटील अपने नेता शरद पवार के साथ 90 के दशक से हैं। कहते हैं दो बार (नवंबर 2019 और जून 2022 में) पवार साहब को भाजपा ने झटका देने की कोशिश की। अब तो जवाब देना बनता है। पाटील कहते हैं कि महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार शरद पवार के प्रयास से बनी थी। उद्धव ठाकरे शिवसेना के साथ पवार के भरोसे पर आए थे। पवार ने ही कांग्रेस को मनाया था। लेकिन भाजपा ने इससे पहले उनके भतीजे अजीत पवार को तोड़ लिया था। कल्याण कहते हैं कि दूसरी बार भाजपा ने जून 2022 में फिर झटका दिया। भाजपा के आपरेशन लोटस ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अपने साथ करके महाविकास अघाड़ी की सरकार गिरा दी। कल्याण पाटील कहते हैं कि शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे की कमजोरी से ऐसा हो गया था। वह कहते हैं कि शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को भी बताया कि कैसे राजनीति की जाती है। पार्टी का नेतृत्व किया जाता है।