इंसान के शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाने को मधुमेह यानी डायबिटीज कहा जाता है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के उस्मानिया जनरल अस्पताल (ओजीएच) के डॉक्टरों समेत शोधकर्ताओं की एक टीम ने डायबिटीज के इलाज का एक 'आध्यात्मिक' तरीका ढूंढ निकाला है। और इसका स्रोत है भगवद्गीता।
शोधकर्ताओं का कहना है कि भगवद्गीता में अर्जुन और भगवान कृष्ण के बीच हुए संवाद को बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है, खास तौर पर डायबिटीज जैसी पुरानी बीमारियों के इलाज में। शोधकर्ताओं का इशारा भगवद्गीता के श्लोकों की ओर है जो जीवन में विभिन्न परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताते हैं।
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Bhagavad Gita
- फोटो : social media
क्या बताती है गीता
शोधकर्ताओं ने कहा, "गीता नकारात्मक स्थितियों की पहचान करती है और उनसे लड़ने के लिए सकारात्मक तरीका बताती है, भगवान कृष्ण ने बताया और अर्जुन ने उसका पालन किया।"
शोधकर्ताओं ने बताया कि डायबिटीज एक लाइफस्टाइल बीमारी है यानी वह आपके जीवनशैली से जुड़ी हुई है। इसलिए इसके इलाज के लिए यह जरूरी हो जाता है कि जीवन शैली में पूरी तरह से बदलाव किया जाए, जिसमें खानपान और कसरत जैसी बुनियादी गतिविधियों में भी बदलाव होना चाहिए।
शोधकर्ताओं ने कहा कि भगवद्गीता की शिक्षाओं का उपयोग कर इसका सामना करने में मदद मिल सकती है।
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देश-विदेश के डॉक्टर रिसर्च में शामिल
यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में देश और विदेश के कई अस्पतालों और रिसर्च इंस्टीट्यूट्स के डॉक्टर और शोधकर्ता शामिल थे।
विदेशी विशेषज्ञ बांग्लादेश के ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल, ढाका के मितफोर्ड अस्पताल और पाकिस्तान में कराची के आगा खान विश्वविद्यालय अस्पताल से थे।
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मरीज को भगवद्गीता की जरूरत क्यों?
शोधकर्ताओं ने कहा, "भगवद्गीता एक धार्मिक या दार्शनिक किताब से कहीं ज्यादा है। इसके 700 से अधिक श्लोक जीवन के हर पहलू को समझने की गहरी समझ देते हैं और यह पूरी दुनिया के प्रासंगिक है।"
इसके साथ उन्होंने कहा कि डायबिटीज की बीमारी का पता लगने पर पीड़ित व्यक्ति को अक्सर दुख की भावनाएं घेर लेती हैं। क्योंकि उसे अपनी जिंदगी में सबसे प्यारी चीजों में से कुछ को छोड़ना पड़ता है।
शोधकर्ताओं ने कहा, "उन्हें संयम बरतने, जीवनशैली बदलने और डॉक्टरी सलाह पर अमल करने के लिए प्रेरित करना होता है। ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा और इंसुलिन लेने में सब खुद से अच्छी निगरानी नहीं रख पाते हैं। तब यहां गीता की जरूरत पड़ती है।"