केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा से पटना में हुई बातचीत अधूरी रही है। एनडीए के सभी सहयोगी दलों की अगली बैठक आठ अक्टूबर को दिल्ली में होगी जिसमें सीट समझौते पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित रहेंगे।
भाजपा के सहयोगी दलों की कई सीटों पर दावेदारी आपस में टकरा रही है जिससे दोनों में सहमति बनने में बाधा आ रही है। भाजपा इस चुनाव में राजगीर की सुरक्षित सीट लेने के मन में है जबकि जदयू अपनी इस पारंपरिक सीट से दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इस मुद्दे पर भाजपा नेताओं की जदयू नेता से भी मुलाकात हुई थी, लेकिन फिलहाल इस सीट पर दोनों ही दल पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी तरह जीतनराम मांझी और लोजपा के बीच भी कम से कम तीन सीटों पर दावेदारी टकरा रही है। महादलित जातियों के प्रभाव वाली सीटों पर दोनों ही दल अपनी दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में भाजपा का दबदबा रहा है। पार्टी इस लोकसभा की सभी विधानसभा सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर रही है, जबकि जदयू इस हिस्से में से भी दावेदारी कर रही है। भाजपा अपने ब्राह्मण चेहरे मंगल पांडेय को कुम्हरार सीट पर उतारने की कोशिश में है, जबकि जदयू इस सीट पर अपनी दावेदारी ठोंक रही है।
NDA को जिताएंगे चिराग- LJP (रामबिलास)
एनडीए में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा लोजपा (रामविलास) नेता चिराग पासवान की है। वे लगातार अपने लिए ज्यादा सीटें मांगकर एनडीए नेताओं से मोलभाव कर रहे हैं। पिछले चुनाव में केवल एक सीट जीतने वाले चिराग पासवान ने जदयू को तीन दर्जन से अधिक सीटों पर हराने में अहम भूमिका निभाई थी। लोजपा के नेता मणिशंकर पांडेय ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली में आठ अक्टूबर की बैठक में चिराग पासवान भी उपस्थित रहेंगे और इस बैठक में सीटों पर सहमति बन जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान के बारे में महागठबंधन के नेताओं के द्वारा कई अफवाह फैलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन चिराग पूरी मजबूती के साथ एनडीए में बने रहेंगे और गठबंधन को जिताने के लिए पूरी कोशिश करेंगे।
एनडीए में सीटों पर माथापच्ची
एनडीए में इस बार सीटों को लेकर ज्यादा माथापच्ची हो रही है। पिछले चुनाव में चिराग पासवान के अलग चुनाव लड़ने के कारण एनडीए में सभी सहयोगी दलों को पर्याप्त हिस्सेदारी मिल गई थी। लेकिन इस बार लोजपा (रामविलास) के एनडीए खेमे में आ जाने के कारण सीटों के बंटवारे में दबाव बढ़ गया है। चिराग पासवान ने अकेले अपने लिए कम से कम 30 सीटों पर दावेदारी ठोंक रखी है।
एनडीए के दूसरे छोटे सहयोगी दलों ने भी अपने लिए ज्यादा सीटों की मांग कर भाजपा-जदयू पर दबाव बना रखा है। जीतन राम मांझी अपने लिए 20 सीटों की दावेदारी कर रहे हैं तो उपेंद्र कुशवाहा ने भी कम से कम दस सीटों पर दावेदारी ठोंक रखी है। लेकिन जीतन राम मांझी को छः-सात सीटें और उपेंद्र कुशवाहा को चार से पांच सीटें मिलने की संभावना है।
बिहार में इस बार जदयू को अधिक सीटें मिलने की संभावना है। राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों में से उसे 103 से 104 सीटें मिलने की संभावना है तो भाजपा भी करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। शेष सीटों में लोजपा (रामविलास), हम और उपेंद्र कुशवाहा की हिस्सेदारी होनी है। यदि कोई अन्य सहयोगी भी इस बीच पाला बदलकर एनडीए खेमे में आता है तो सीटों के बंटवारे में दबाव और अधिक बढ़ सकता है।