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केंद्र के बस की बात नहीं पेट्रोल-डीजल के दाम घटाना- धर्मेंद्र प्रधान

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Sep 2018 08:05 PM IST
धर्मेंद्र प्रधान, पेट्रोलियम मंत्री (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
देश के प्रधानमंत्री भले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हों, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम अंकल ट्रंप घटाएंगे। देश पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मामलों के मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का यही कहना है। जब धर्मेन्द्र प्रधान से इसके पेट्रोल-डीजल के बढ़ रहे दाम के बाबत पूछा गया तो उन्होंने सीधे हाथ खड़ा कर दिया। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम घटाना केन्द्र सरकार के बस की बात नहीं है।
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इसके बाद पेट्रोलियम मंत्री से यह जानने की कोशिश हुई कि पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने को लेकर क्या संभावना है तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया कि इस बारे में अंकल ट्रंप ही बता सकते हैं। देखिए वह कब दाम घटाते हैं। पेट्रोलियम मंत्री का यह बयान वहां खड़े भारत सरकार के कुछ अफसरों को भी हंसा गया।

एक संयुक्त सचिव स्तर के अफसर ने बाद में टिप्पणी भी कि क्या संवाददाता यह सवाल अमेरिका के पेट्रोलियम मंत्री से पूछ रहा था? धर्मेन्द्र प्रधान से यह सवाल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद होने वाली ब्रीफिंग के समय पूछा गया था।

सरकार का तरीका सही : गोयल

भारतीय रेल मंत्री ने पेट्रोल डीजल के दामों को काबू में रखने को लेकर केन्द्र सरकार के तरीके को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इसको लेकर संवेदनशील है और सही तरीका अपना रही है। पीयूष गोयल ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम में कटौती के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती सही उपाय नहीं है।

इससे समस्या सुलझने के बाद और अधिक उलझ जाएगी। रेलमंत्री ने कहा कि उत्पाद शुल्क घटाने से राजकोषीय घाटा बढ़ेगा। राजकोषीय घाटे का बढऩा अच्छा नहीं रहेगा। इस तरह से एक समस्या के समाधान के लिए दूसरी बड़ी समस्या को आमंत्रित करने जैसा होगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार ही घटाए तो घटाए

केन्द्र सरकार के दोनों मंत्रियों के रुख से साफ है कि केन्द्र सरकार देश की जनता को पेट्रोल-डीजल के दाम में फिलहाल कोई राहत नहीं देने जा रही है। केन्द्र सरकार ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख पर छोड़ दिया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मामलों के मंत्री पहले कच्चे तल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि को ही तेल के दामों में आए उछाल का कारण बता चुके हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली लगातार राजकोषीय घाटे को लेकर संवेद्रशील बने हैं।

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