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Maharashtra: हनुमान जन्मस्थान को लेकर आपस में भिड़े संत, एक-दूसरे पर माइक से किया हमला

Tue, 31 May 2022 09:32 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुम्बई

सार

मंगलवार को 'धर्मसभा' की शुरुआत में ही पहले बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद में एक-दूसरे पर ताने मारने जैसे अन्य मुद्दों पर साधुओं के बीच विवाद हो गया। जिसके बाद इस धर्मसभा को स्थगित कर दिया गया। 
 
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धर्मसभा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : जी पॉल
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विस्तार
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भगवान राम के अनन्य भक्त हनुमान जी के जन्मस्थान पर जारी विवाद को लेकर नासिक में मंगलवार को नासिक में धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा के दौरान वहां मौजूद साधुओं के बीच विवाद हो गया। इस दौरान साधुओं ने माइक उठाकर एक-दूसरे को मारने का प्रयास भी किया। जिसके बाद पुलिस को शांति-व्यवस्था बहाल करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। फिलहाल इस धर्मसभा को स्थगित कर दिया गया है। 

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किष्किंधा मठ के स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने किया था दावा
दरअसल, किष्किंधा मठ के अधिपति स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने हाल ही में दावा किया था कि किष्किंधा (कर्नाटक में बाद के दिनों में हम्पी क्षेत्र में माना जाता है) हनुमान का जन्मस्थान था। उन्होंने नासिक में अंजनेरी के हनुमान जी के जन्मस्थान होने के दावे को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने कहीं नहीं लिखा है कि हनुमान जी का जन्म अंजनेरी में हुआ था। इतना ही नहीं उन्होंने असहमत लोगों को सबूत पेश करने की भी चुनौती दे दी थी, जिसके बाद यहां के साधु-महंतों ने एक धार्मिक बैठक बुलाने का फैसला किया था।

अंजनेरी के स्थानीय और साधुओं ने किया विरोध
जिसके बाद इस विवाद को खत्म करने के लिए महंत श्री मंडलाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी अनिकेत शास्त्री देशपांडे महाराज ने 31 मई को नासिक में धर्म संसद बुलाई थी। इसी सिलसिले में गोविंदानंद सरस्वती त्र्यंबकेश्वर पहुंचे थे। वहां से एक विशाल जुलूस के साथ वे अंजनेरी पहुंचे। जिस पर वहां के निवासियों और साधुओं ने विरोध दर्ज कराया था।  उनका कहना था कि इससे वहां का माहौल खराब हो सकता है। 
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धर्मसभा में बैठने के लिए हुआ विवाद
अंजनेरी के स्थानीयों द्वारा किए गए विरोध के बारे में बताते हुए अधिकारियों ने बताया कि गोविंदानंद सरस्वती के आगमन पर लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सोमवार को नासिक-त्र्यंबकेश्वर मार्ग को जाम कर दिया था। उन्होंने बताया कि मंगलवार को 'धर्मसभा' की शुरुआत में ही पहले बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद में एक-दूसरे पर ताने मारने जैसे अन्य मुद्दों पर साधुओं के बीच विवाद हो गया।  

कांग्रेसी कहने पह भड़क गए साधू
मिली जानकारी के मुताबिक, जिस समय सभा में मौजूद एक साधू अपना परिचय दे रहे थे, तो यहां भगवान कालाराम मंदिर के महंत सुधीरदास ने कथित तौर पर उन्हें कांग्रेसी कहा। जिससे बाद दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। इस बीच, गोविंदानंद सरस्वती के अनुयायियों ने दावा किया कि उन्हें बैठक में अपने विचार रखने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान साधुओं ने माइक उठाकर एक-दूसरे को मारने का प्रयास भी किया। 

इस धर्मसभा में कैलाश स्वामी मठ के स्वामी संविदानंद सरस्वती, शौके गुरुजी और पुरोहित संघ के अध्यक्ष सतीश शुक्ला मौजूद थे। कुछ साधुओं ने बताया कि फिलहाल धर्मसभा को स्थगित कर दिया गया है। इसके लिए नई तारीख की बाद में घोषणा की जाएगी। 

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