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कांग्रेस शासित तीन राज्यों में डीजीपी पद पर रार, राजस्थान-पंजाब में कोर्ट तक पहुंचा मामला

Mon, 02 Mar 2020 10:01 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कमलनाथ-अमरिंदर सिंह-अशोक गहलोत - फोटो : Social Media
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कांग्रेस शासित मध्यप्रदेश, राजस्थान और पंजाब में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर रार जारी है। एक तरफ जहां पंजाब और राजस्थान में मामला कोर्ट में है वहीं मध्यप्रदेश में सरकार वर्तमान डीजीपी वीके सिंह को खुद हटाना चाहती है।

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2006 में जारी किए गए दिशानिर्देशों के अनुसार पुलिस अधीक्षक (एसपी), पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और पुलिस महानिदेशक को दो साल से पहले नहीं हटाया जा सकता। इनमें से राजस्थान में डीजीपी की नियुक्ति के मामला सुप्रीम कोर्ट जबकि पंजाब के डीजीपी के नियुक्ति का मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहा है।

मध्यप्रदेश: यूपीएससी द्वारा सुझाए गए नामों को डीजीपी नहीं बनाना चाहती सरकार
कमलनाथ सरकार से कई मुद्दों पर गतिरोध होने के कारण वर्तमान पुलिस महानिदेशक वीके सिंह की विदाई तय मानी जा रही है। इनके स्थान पर राजेंद्र कुमार को मध्यप्रदेश पुलिस का नया चीफ बनाया जा सकता है।
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बता दें कि कमलनाथ सरकार ने डीजीपी के लिए यूपीएससी को आईपीएस के नामों का पैनल भेजा था। इसमें से तीन नामों को यूपीएससी ने डीजीपी के लिए वापस भेजा, लेकिन सरकार इनमें से किसी को पुलिस प्रमुख बनाने पर तैयार नहीं है।

राजस्थान: यूपीएससी द्वारा सुझाव आने के 17 दिन पहले ही दे दी नियुक्ति, मामला सुप्रीम कोर्ट में
राजस्थान की गहलोत सरकार ने यूपीएससी द्वारा नामों को सुझाने के 17 दिन पहले ही 30 जून 2019 को डीजीपी के पद पर डॉ भूपेंद्र सिंह यादव की नियुक्ति कर दी। इसके बाद 17 जुलाई 2019 को यूपीएससी के पैनल ने डॉ. एनआरके रेड्डी, डॉ. आलोक त्रिपाठी व डॉ. भूपेन्द्र यादव को डीजीपी पद के लिए योग्य माना। 

विवाद बढ़ने पर राज्य सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसपर सुनवाई होने का इंतजार है। याचिका में कहा गया है कि डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों की अवहेलना की गई है।

पंजाब: चार वरिष्ठ आईपीएस को दरकिनार कर कनिष्ठ को बनाया डीजीपी, मामला हाईकोर्ट में
पंजाब की अमरिंदर सरकार ने चार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को नजरअंदाज कर कनिष्ठ अधिकारी 1987 बैच के आईपीएस दिनकर गुप्ता को सात फरवरी 2019 को राज्य के पुलिस का मुखिया बना दिया। जिसके बाद दिनकर गुप्ता से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मोहम्मद मुस्तफा और सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ अपील दायर की।

जिसके बाद कैट ने दिवाकर गुप्ता की डीजीप पद पर नियुक्ति को रद्द कर दिया। हालांकि, इस फैसले पर पंजाब सरकार को हाईकोर्ट से स्टे मिल गया है। बता दें कि चार दिन बाद पांच मार्च को इस मामले की सुनवाई होनी है।

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