दुनियाभर में कोरोनावायरस के डेल्टा वैरिएंट के बाद ओमिक्रॉन वैरिएंट का कहर जारी है। भारत को बीते कुछ दिनों में संक्रमितों की बढ़ती संख्या से राहत जरूर मिली है, लेकिन ओमिक्रॉन स्वरूप के खिलाफ किसी कारगर टीके के न होने की वजह से आने वाले कुछ दिनों में भी लोगों पर संक्रमित होने का खतरा लगातार बरकरार रहेगा। इस परेशानी से निपटने के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक DCGI) ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की तरफ से ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
डीसीजीआई ने चार फरवरी को जारी एक मंजूरी आदेश में कहा, ‘‘आपके आवेदन के संदर्भ में, कृपया नई दवाओं और क्लीनिकल परीक्षण नियम, 2019 के प्रावधानों के तहत जांच, परीक्षण और विश्लेषण के लिए SARS-COV-2 rS प्रोटीन (कोविड-19) पुनः संयोजक स्पाइक प्रोटीन नैनोपार्टिकल वैक्सीन (ओमीक्रॉन वैरिएंट) के निर्माण की अनुमति दी जाती है।’’
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि सीरम इंस्टीट्यूट में सरकार और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने छह जनवरी को डीसीजीआई को एक आवेदन दिया था। इसमें कहा गया था कि पुणे में स्थित उनकी फर्म नोवावैक्स इंक के सहयोग से ओमीक्रॉन के खिलाफ एक टीके के निर्माण पर काम कर रही है।
बताया गया है कि सीरम इंस्टीट्यूट ने जांच, परीक्षण और विश्लेषण के लिए सार्स-सीओवी-2आरएस दवा के पदार्थों के निर्माण के लिए अनुमति और लाइसेंस हासिल किया है। कंपनी के एक अधिकारी के मुताबिक, ‘‘कोरोनावायरस के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन के मामले पहले ही 60 से अधिक देशों में दर्ज हुए हैं। दुनियाभर में और हमारे देश में भी इस वैरिएंट का बहुत तेजी से फैलना जारी है।
प्रकाश कुमार ने आवेदन में कहा था, ‘‘इस टीके का निर्माण हमारे प्रधानमंत्री के ‘मेकिंग इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ के आह्वान के अनुरूप हमारे देश के टीका उत्पादन शक्ति का एक और उदाहरण होगा और हमारे देश के झंडे को विश्व स्तर पर ऊंचा रखेगा।’’ उन्होंने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला भी महामारी के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता में हैं।