DGCA जल्द कराएगा क्रू का रैंडम टेस्ट
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भारतीय विमानन क्षेत्र में फ्लाइट क्रू की सुरक्षा जांच को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) जल्द ही सभी भारतीय एयरलाइनों में फ्लाइट क्रू की साइकोएक्टिव पदार्थों को लेकर रैंडम जांच के नियम को लागू कर सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हर एयरलाइन को सालाना अपने 25 फीसदी से अधिक फ्लाइट क्रू की रैंडम जांच करनी होगी। यह जांच यूरिन सैंपल के जरिए की जाएगी।
क्या हर एयरलाइन पर लागू होगा नया नियम?
सूत्रों के अनुसार, डीजीसीए इस व्यवस्था को जल्द ही देश की हर भारतीय एयरलाइन में लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य फ्लाइट क्रू द्वारा प्रतिबंधित या नियमों के तहत अनुमत नहीं किए गए साइकोएक्टिव पदार्थों और दवाओं के इस्तेमाल की पहचान करना है। यह कदम विमानन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
AI-2379 के पायलट पर क्या कार्रवाई हुई?
फुकेट फ्लाइट से जुड़े हालिया मामले के बाद एअर इंडिया की उड़ान AI-2379 के पायलट को डी-रोस्टर कर दिया गया है। यानी फिलहाल पायलट को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट अगले 10 दिनों में सामने आने की उम्मीद है।
एअर इंडिया ने अपने पायलटों की जांच कब शुरू की?
सूत्रों के मुताबिक, 13 अगस्त से एअर इंडिया अपने ग्रुप के सभी पायलटों की पूरी स्क्रीनिंग करा रही है। इसमें उन पदार्थों या दवाओं की जांच की जा रही है, जिनका इस्तेमाल मौजूदा विमानन नियमों के तहत प्रतिबंधित या अनुमत नहीं है। एअर इंडिया इन जांचों की रिपोर्ट डीजीसीए के साथ भी साझा कर रही है। डीजीसीए इन रिपोर्टों की समीक्षा कर रहा है।
क्या रैंडम टेस्ट से बढ़ेगी विमान सुरक्षा?
प्रस्तावित नियम के तहत हर साल 25 फीसदी से ज्यादा फ्लाइट क्रू की अचानक जांच किए जाने से प्रतिबंधित साइकोएक्टिव पदार्थों के इस्तेमाल पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। इससे फ्लाइट क्रू की फिटनेस और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर नियामक निगरानी भी मजबूत होगी। AI-2379 मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद यह साफ हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।