नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने प्रतिकूल मौसम के दौरान एयरलाइन के लिए अपने परिचालन दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। इनमें इस बात पर बल दिया गया है कि सुरक्षा को ‘समय-सारिणी के पालन’ से अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा पायलटों को अप्रत्याशित परिस्थितियों में उड़ानों का मार्ग बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
नियामक ने पायलट मौसम रिपोर्ट के महत्व के साथ-साथ प्रतिकूल मौसम की स्थिति और कंपन के दौरान यात्रियों, चालक दल के सदस्य और हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) के साथ संवाद करने पर जोर दिया। बयान के अनुसार इसमें समय पर ब्रीफिंग, यात्रियों के लिए अग्रिम घोषणाएं, तथा बेहतर समन्वय और परिस्थितिजन्य जागरूकता के लिए एटीसी को कंपन की सूचना देना शामिल है।
आइस क्रिस्टल आइसिंग जैसी जटिल स्थितियों का पहली बार उल्लेख किया गया है। इसमें पायलटों को सलाह दी गई है कि वे वैश्विक नियमों के अनुरूप ऐसे क्षेत्रों में चढ़ने या उतरने के बजाय क्षितिज रूप से नेविगेट करें। मौसम से बचाव की योजना पहले से तैयार रखने को कहा गया है। यात्री, क्रू और एटीसी से संवाद बनाए रखने, समय पर सूचना देने, और टर्बुलेंस की रिपोर्ट साझा करने की महत्ता पर जोर दिया गया है।