विमानन निदेशालय (डीजीसीए) ने एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक पायलट की अचानक मौत के मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पायलट की नौ अप्रैल को श्रीनगर से उड़ान भरने के तुरंत बाद दिल्ली हवाई अड्डे पर हृदयघात (कार्डियक अरेस्ट) से मौत हो गई थी। डीजीसीए के मुताबिक, जांच टीम को अंतिम रिपोर्ट जल्द से जल्द (अधिकतम छह महीने) के अंदर जमा करनी होगी।
इस जांच में यह देखा जाएगा कि मौत किन परिस्थितियों में हुई, पायलट की पुरानी मेडिकल रिपोर्ट कैसी थी और ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए जो नियम हैं, क्या वे ठीक हैं या बदलाव की जरूरत है। 17 अप्रैल को जारी डीजीसीए के आदेश के मुताबिक, जांच टीम न सिर्फ मृत पायलट की मेडिकल हिस्ट्री की जांच करेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि क्या ऐसे पायलटों की ड्यूटी लगाते समय सावधानी बरती गई थी, जिन्हें मेडिकल कारणों से उड़ान भरने की पाबंदी थी।
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इस बात की भी जांच की जाएगी कि क्या ऐसे पायलटों के लिए कोई विशेष मेडिकल जांच जरूरी है, जो उड़ान से पहले कराई जानी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जब पायलट ने अस्वस्थ महसूस होने की बात कही, तो क्या बाकी क्रू मेंबर्स ने सही समय पर कार्रवाई की या नहीं।
डीजीसीए के मुताबिक, जांच में यह भी देखा जाएगा कि अस्वस्थ पायलट को एयरपोर्ट के स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में कितना समय लगा। साथ ही, टीम यह भी जांचेगी कि एयरपोर्ट का स्वास्थ्य केंद्र ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए कितना तैयार था। मौजूदा नियमों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा की जाएगी और जरूरत हो तो बदलाव के सुझाव भी दिए जाएंगे। इस जांच के लिए एयर सेफ्टी के उप निदेशक विशाल यादव को प्रमुख जांच अधिकारी बनाया गया है और ग्रुप कैप्टन मुर्तजा एक विशेषज्ञ के रूप में जांच में शामिल होंगे।
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विमानन निदेशक फैज अहमद किदवई ने इन बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए हैं-
1. क्या फ्लाइट के दौरान क्रू मेंबर ने बीमार महसूस करने की सूचना एटीसी को दी थी? अगर दी थी, तो क्या एटीसी ने समय पर और सही कार्रवाई की?
2. मृत क्रू मेंबर की मेडिकल हिस्ट्री की जांच की जाए।
3. क्या कंपनी ने शेड्यूल बनाते समय यह ध्यान रखा था कि किसी ऐसे क्रू को फ्लाइट पर न लगाया जाए, जिसे मेडिकल कारणों से उड़ान भरने पर रोक हो?
4. क्या ऐसे पायलटों के लिए कोई विशेष मेडिकल जांच की जरूरत है, जिसे फ्लाइट पर जाने से पहले करवाना जरूरी है?
5. क्या क्रू मेंबर्स ने सही समय पर कार्रवाई की, जब फर्स्ट ऑफिसर ने खुद को अस्वस्थ बताया?
6. फर्स्ट ऑफिसर को एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर या सिविल अस्पताल तक पहुंचाने में कितना समय लगा?
7. एयरपोर्ट पर जो स्वास्थ्य केंद्र है, क्या वो ऐसी आपात स्थिति को संभालने के लिए तैयार था?
8. इस मामले में मौजूदा गाइडलाइंस/सर्कुलर की समीक्षा की जाए और अगर जरूरत हो तो संशोधन के सुझाव दिए जाएं।
10 अप्रैल को एक बयान में एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने कहा था, हम अपने एक मूल्यवान सहयोगी की मेडिकल कारणों से हुई मृत्यु पर गहरा दुख प्रकट करते हैं। हम सभी से निवेदन करते हैं कि इस समय निजता का सम्मान करें और अनावश्यक अटकलें लगाने से बचें। हम जांच प्रक्रिया में सभी संबंधित अधिकारियों को पूरा सहयोग देंगे।