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2004 जैसे मोड़ पर कर्नाटक, किंगमेकर से किंग बनने की कला जानते हैं देवगौड़ा

Wed, 16 May 2018 10:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
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कर्नाटक की राजनीति के रंगमंच की कहानी भले ही नई हो लेकिन इसके किरदार नहीं बदले हैं। एचडी देवगौड़ा को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में किंगमेकर माना जा रहा था। लेकिन परिणाम आने के बाद सबसे कम विधायक होने के बावजूद वह किंग बनने की स्थिति में आ गए हैं। 
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कर्नाटक फिर उसी मोड़ पर खड़ा है, जहां 2004 के विधानसभा चुनाव के बाद था। तब भी भाजपा 79 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। कांग्रेस को 65 सीटें मिली थीं। 58 सीटें जीतने वाली देवगौड़ा की जेडीएस तीसरे पायदान पर खड़ी थी। कांग्रेस एसएम कृष्णा को सीएम बनाना चाहती थी, लेकिन देवगौड़ा के दबाव के चलते उसे झुकना पड़ा और एन धरम सिंह सीएम बन गए।

नाम से परिचित तक नहीं थे कई, बन गए पीएम -
किंगमेकर से किंग बनने की देवगौड़ा की कहानी 1996 से शुरू होती है। तब वह 14 दलों के यूनाइटेड फ्रंट की सरकार में अचानक प्रधानमंत्री बन गए थे। जबकि वह यूनाइटेड फ्रंट सरकार की पहली तीन पसंद में भी शामिल नहीं थे। इससे पहले, राष्ट्रीय फलक पर उनका नाम किसी ने नहीं सुना था। हालांकि बाहर से समर्थन दे रही कांग्रेस के हाथ खींच लेने से उनकी पारी दस माह में ही खत्म हो गई।
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राजनीतिक दांव से कांग्रेस-भाजपा दोनों को दी पटखनी -
देवगौड़ा अपने सियासी दांव से कांग्रेस और भाजपा दोनों को चित कर चुके हैं। 2004 में उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार बनाई। उस समय भाजपा को सांप्रदायिक बताते हुए उसे सत्ता से दूर रखने की बात कही। लेकिन दो साल बाद ही बेटे एचडी कुमारस्वामी को सीएम बनाने के लिए पलटी मारते हुए कांग्रेस को छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। उन्होंने भाजपा के साथ सीएम पद की अदला-बदली का फार्मूला अपनाया था। कुमारस्वामी 2007 तक कर्नाटक के सीएम रहे। लेकिन जब सीएम पद भाजपा को देने की बारी आई तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया।

भांप गए थे सिद्धारमैया की महत्वाकांक्षा को -
2004 में कांग्रेस-जेडीएस सरकार में सिद्धारमैया जेडीएस कोटे से डिप्टी सीएम थे। वह तेजी से पार्टी के नए चेहरे के तौर पर उभर रहे थे। देवगौड़ा ने भांप लिया था कि महत्वाकांक्षी सिद्धारमैया कुमारास्वामी के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए उन्होंने सिद्धारमैया को बाहर का दरवाजा दिखा दिया। उनका आकलन सही साबित हुए। सिद्धारमैया कांग्रेस में शामिल हुए और कुछ ही साल में सीएम भी बन गए।

जेडीएस - कभी नहीं गंवाया वोट बैंक
चुनाव            वोट प्रतिशत      सीट
1999            10               10
2004            20               59
2008            18.96          28
2013            20.10          40
2018            18.40          37    

मैसूर कर्नाटक में पकड़ का कोई तोड़ नहीं -
जेडीएस को ओल्ड मैसूर की सबसे मजबूत पार्टी माना जाता है। कर्नाटक की 12 प्रतिशत वोकालिंगा समुदाय जेडीएस का कोर वोटर है। कर्नाटक असेंबली में 53 सीटों पर वोकालिंगा जाति अपना प्रभाव रखती है। यही सीटें जेडीएस की राजनीतिक लाइफलाइन है।
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