महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि फडणवीस सरकार के दौरान नागपुर पहचान अपराध की राजधानी बन गई थी। लेकिन अब राज्य भर में कानून व्यवस्था की स्थिति ठीक है। देशमुख ने पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस पर हमला बोलते हुए कहा कि कुख्यात गुंडा संतोष और मुन्ना यादव को किसने आश्रय दिया था। यह सभी जानते हैं।
शनिवार को विधान परिषद में कानून-व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों को लेकर हुए अंतिम सप्ताह प्रस्ताव चर्चा का जवाब देते हुए गृहमंत्री देशमुख ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगर दिल्ली के शाहीन बाग के आंदोलनकारियों से चर्चा की होती तो पूरे देश में शाहीन बाग नहीं पसरता।
देशमुख ने दिल्ली हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन जज मुरलीधर के आदेश का उल्लेख किया। भाजपा के सदस्यों ने शाह का उल्लेख करने पर आपत्ति जताई। इसके बाद देशमुख ने सफाई दी कि शाह हम सभी के गृह मंत्री हैं।
महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ मुंबई बाग समेत राज्य भर में हुए आंदोलन में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का अभी तक सीधे कोई संबंध सामने नहीं आया है। फिर भी सरकार गहराई से जांच करेगी।
महाराष्ट्र से 603 बांग्लादेशी वापस भेजे गए : देसाई
महाराष्ट्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ 2015 से 2019 के बीच 660 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें 3431 आरोपी हैं, जबकि 603 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया है। गृह राज्यमंत्री देसाई ने कहा कि मुंबई के साकीनाका में 15 जनवरी 2020 को तीन बांग्लादेशी मिले थे।
तीनों को गिरफ्तार किया गया है। पालघर के अरनाला में 12 फरवरी 2020 को 22 बांग्लादेशी पकड़े गए थे। इसमें 10 महिला और 12 पुरुष हैं।
कोरोना वायरस के चलते महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र शनिवार को समाप्त हो गया। लेकिन महिलाओं पर अत्याचार रोकने का कानून नहीं बन पाया। राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने शनिवार को कहा कि महिला अत्याचार के खिलाफ कठोर कानून बनाने के लिए दो दिवसीय विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इसमें आंध्र प्रदेश में लागू दिशा एक्ट की तरह कठोर कानून बनाया जाएगा।
देशमुख ने कहा कि विधानमंडल सत्र की कालावधि 20 मार्च तक निर्धारित थी लेकिन कोरोना वायरस के चलते सत्र की कालावधि घटा दी गई है। इसके चलते महिला अत्याचार विरोधी नया कानून बनाना संभव नहीं हो पाया।
लेकिन कोरोना वायरस का संक्रमण खत्म होने के बाद विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से विनती करेंगे। उसके बाद दिशा एक्ट की तर्ज पर कठोर कानून बनाया जाएगा। जिससे महिलाओं पर अत्याचार करने वाले दोषिय़ों को जल्द और शीघ्र सजा मिल सकेगी।