गुजरात भाजपा का गढ़ माना जाता है और यहां ऐसी कई विधानसभा सीटें हैं जहां भाजपा का पिछले कई चुनावों से दबदबा रहा है। ऐसी सीटों में एक नवसारी विधानसभा सीट है। इस सीट पर 1990 से ही भाजपा का कब्जा है। दादाभाई नौरोजी की जन्मभूमि रही नवसारी से जमशेदजी टाटा और रतन टाटा का खास लगाव रहा है। इलाके में भारी संख्या में राइस मील होने के कारण पोहे के करीब 100 कारखाने हैं। यहां से महज 10 किलोमीटर दूर दांडी है, जहां महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह किया था।
लोगों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में इलाके में विकास तो खासा हुआ है, लेकिन विकास के साथ समस्याओं का भी उतनी ही रफ्तार से विकास हुआ है। महंगाई, बेरोजगारी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। यहां के लोगों का मानना है कि नवसारी देश के दूसरे हिस्सों से अलग नहीं है और देशवासी जिस समस्या से दो-चार हो रहे हैं, यहां के लोगों को भी उन्हीं दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
20 साल में कितना बदला नवसारी?
इलाके में शिक्षा और स्वास्थ्य के बारे में स्थानीय निवासी तेजल सोनी कहते है कि 20-25 साल पहले हम मुंबई से नवसारी आए थे। तब से यहां स्कूलों की संख्या के साथ ही चिकित्सा केंद्रों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खास कर अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। इलाके में कैंसर अस्पताल भी है।
वहीं, योगीनीबेन सोनी कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त हैं। उनका कहना है कि अमीर और गरीब का गुजारा तो किसी तरह से चल जाता है क्योंकि अमीरों की किसी बात की चिंता नहीं और गरीबों के लिए सरकार की ढेर सारी योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन मध्यमवर्ग के लोग हर तरफ से पिसते हैं। सरकार की ओर से ब्याज दरों में लगातार कटौती किए जाने के कारण बैंक में जमा राशि घटती जा रही है। जबकि रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। इसलिए ये चाहती हैं कि तेल की कीमतों को कम करने के साथ ही रोजमर्रा के व्यवहार में आने वाली आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी की होनी चाहिए, जिससे लगातार गरीबी सीमा की ओर जा रहे मध्यमवर्ग को कुछ राहत मिले।
पर्यटन से लेकर पानी तक की कितनी परेशानी?
अरविंद भाई सोनी को शिकायत है कि पर्यटन के तौर पर नवसारी को विकसित नहीं किया जा सका है, जबकि महज कुछ दूरी पर दांडी में खासा विकास हुआ है। भरत गुप्ता नवसारी के वेजलपुर इलाके में रहते हैं। भरत कहते हैं, "अभी तक मेरे घर में पीने वाला पानी नहीं पहुंच सका है। करीब तीन-चार महीने पहले सरकार ने वेजलपुर इलाके में मीठे पानी के प्लांट का उद्घाटन किया था। लेकिन इलाके के लोग आज तक पानी की बूंद को तरस रहे हैं। मामला उद्घाटन से आगे नहीं बढ़ सका। गटर की हालत इतनी दयनीय है कि जल जमाव से लेकर दूसरी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।’
सरकारी स्कूलों के हाल पर क्या बोले लोग?
भरत को मौजूदा शिक्षा व्यवस्था से भी नाराजगी है। भरत कहते हैं,’मैं जहां काम करता हूं और जहां रहता हूं, दोनों जगह कई सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। यहां नजदीक एक आंबेडकर स्कूल है। स्कूल की हालत बेहद दयनीय है। बच्चे जोखिम लेकर स्कूल में शिक्षा हासिल करने पहुंचते हैं। कई सरकारी स्कूल ऐसे भी हैं, जहां महज एक ही शिक्षक है। किसी तरह वह स्कूल चलाने भर का काम करता है। समस्याओं की फेहरिस्त में सड़कें भी शामिल हैं। सड़कों की हालत भी बहुत ही खराब है। बारिश के मौसम में हाईवे की सड़क पर एक-एक फीट के गड्डे पर जाते हैं। इससे वाहनों को चलाने में दूभर होती है। कई वाहन गड्ढों के कारण पलट भी जाते हैं, जिससे लोगों को चोट लगती है।"
नवसारी में कुल मतदाताओं की संख्या 2,47,118 है। इसमें 1,23,022 महिला और 1,24,081 पुरुष मतदाता हैं। महिलाओं की संख्या कुल मतदाताओं के मुकाबले 50 फीसद से ज्यादा है। नवसारी विधानसभा में पारसी समुदाय के वोट भी खासा महत्व रखते हैं। अगर आंकड़ों की बात की जाए तो 1990 से यहां की विधानसभा सीट पर भाजपा ही जीतती आ रही है। इस बार मुकाबला त्रिकोणीय बताया जा रहा है। इलाके के लोग चाहते हैं कि सत्ता पर कोई भी काबिज हो, उसे लोगों की हालत सुधारने पर गौर करना चाहिए।