सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान में बने डिटेंशन सेंटर
बहरहाल, देश में बने डिटेंशन सेंटर कानून के हिसाब से और सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान से बाद ही बनाए गए हैं। ये सेंटर कई राज्यों में पिछले कुछ दशकों से काम रहे हैं और इनका राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से कोई संबंध नहीं है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इन सेंटरों पर विदेशी नागरिकों को उनके वास्तविक देश का पता लगने और संबंधित सरकारों के यात्रा दस्तावेज जारी होने जैसे कामों के पूरा होने तक रोक कर रखा जाता है।
गृह मंत्रालय के अनुसार डिटेंशन सेंटर का मकसद उस व्यक्ति के यात्रा दस्तावेज तैयार होने तक उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिहाज से बने होते हैं ताकि सही वक्त पर वे भारत से बाहर जा सकें। मंत्रालय नेे इससे संबंधित निर्देश सुप्रीम कोर्ट के 28 फरवरी 2012 के एक आदेश के अनुपालन में दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी, 2018 को दिए आदेश के अनुरूप आदर्श डिटेंशन सेंटर मैन्युल तैयार किया गया और फिर इसे गृह मंत्रालय ने नौ जनवरी, 2019 को सभी राज्यों को भेजा। कोर्ट ने गौर किया था कि सजा पूरी करने वाले विदेशी नागरिकों कों तुरंत जेल से रिहा करना चाहिए और उनके निर्वासन या वापस भेजे जाने तक सीमित आवाजाही के साथ ऐसे उचित स्थान पर रखा जाना चाहिए जहां बिजली, पानी और स्वच्छता की बुनियादी सुविधाएं हो।
डिटेंशन सेंटर के लिए कौन से हैं कानून
विदेशी नागरिक कानून, 1946 केंद्र को किसी विदेशी नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाने और व्यक्ति को किसी खास स्थान पर निवास की आवश्यकता का आदेश देने का अधिकार देता है। इसके अलावा, पासपोर्ट कानून, 1920 के तहत, केंद्र किसी भी ऐसे व्यक्ति को भारत से हटने का निर्देश दे सकता है, जिसने बिना वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों के यहां प्रवेश किया हो।
कहां कहां हैं डिटेंशन सेंटर
ऐसे डिटेंशन सेंटर असम (गोलपारा, कोकराझार, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और सिलचर की जिला जेलों में), एनसीआर दिल्ली (सेवा सदन - लामपुर व महिला सदन - महिलाओं के लिए, बांग्लादेशियों के लिए शहजादबाग), पंजाब (केंद्रीय जेल, अमृतसर में), राजस्थान (अलवर में जेल परिसर में), पश्चिम बंगाल (सुधार गृह), गुजरात (भुज) और तमिलनाडु में हैं।