भारत में Electric Vehicles को सरकार द्वारा बढ़ावा दिए जाने के दौर में तमाम वाहन निर्माता कंपनियां अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के पोर्टफोलियो बढ़ा रही हैं। विभिन्न ऑटो कंपनियां बाजार में अपनी गाड़ियों का इलेक्ट्रिक वर्जन और इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर, बाइक और थ्री व्हीलर के नए मॉडल्स पेश कर रहीं हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को पसंद भी किया जा रहा है। ऐसे माहौल में भारतीय वाहन निर्माता कंपनी Lohia Auto Industries (लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज) अगले साल पांच नए उत्पाद बाजार में लॉन्च करने की योजना बना रही है। कंपनी के मुताबिक वह 3 Electric 3 wheeler (इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर) वाहन और 2 Electric Scooter (ई-स्कूटर) लॉन्च करेगी।
Lohia Auto Industries के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आयुष लोहिया ने गुरूवार को बताया कि कंपनी नए साल में उभरते ई-वाहन बाजार की संभावनाओं पर ध्यान देगी। उन्होंने कहा, "अब ई-वाहनों की मांग बढ़ रही है। इसे देखते हुए हम अगले साल तीन तिपहिया वाहन और दो स्कूटर पेश करेंगे। हम पहला वाहन फरवरी में पेश करेंगे। उसके बाद हर दो-तीन महीने में एक नया उत्पाद उतारा जाएगा।"
लोहिया ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी की बिक्री में 20-25 प्रतिशत गिरावट चल रही है। पूरा वाहन उद्योग मांग में गिरावट से प्रभावित है। उन्होंने कहा, "नये साल को लेकर हम आशान्वित है। हम नये ई-वाहनों की जो पेशकश करने जा रहे है उससे हमारा प्रदर्शन बेहतर होने की उम्मीद है।"
लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज अभी ओमा ई-स्कूटर और हमराही तथा कम्फर्ट ई-रिक्शा की बिक्री कर रही है। कंपनी हमसफर तिपहिया के पेट्रोल व डीजल संस्करणों का निर्यात भी करती है। कंपनी ने मोटरसाइकिल बाजार में उतरने के लिए यूएम मोटरसाइकिल्स के साथ सितंबर 2014 में संयुक्त उपक्रम भी बनाया था। हालांकि संयुक्त उपक्रम सफल नहीं हो सका और आखिरकार इसे कारोबार समेटना पड़ा।
भविष्य में संयुक्त उपक्रम की संभावना के बारे में पूछे जाने पर लोहिया ने कहा, "निश्चित ही संयुक्त उपक्रम को लेकर हमारा एक अनुभव खराब रहा, लेकिन हमने भविष्य में नये संयुक्त उपक्रम बनाने को लेकर विकल्प खुले रखे हैं।"
संयुक्त उपक्रम यूएम लोहिया के डीलरों के द्वारा कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने टिप्पणी करने से मना कर दिया। कंपनी अभी उत्तराखंड के काशीपुर में स्थित संयंत्र में अपने वाहनों का विनिर्माण करती है। इस संयंत्र की क्षमता सालाना एक लाख वाहन बनाने की है।
गौरतलब है कि लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने साल 2030 तक सड़कों पर 30 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन उतारने का निर्णय लिया है। पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों से तुलना करें तो भारतीय सड़कों पर अभी सिर्फ 0.06 फीसदी इलेक्ट्रिक कारें चलती हैं। सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लगातार प्रोत्साहन देने की घोषणाएं कर रही है। सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ी की खरीद पर जीएसटी की दर को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है।
यही नहीं सरकार National Electric Mobility Mission Plan (नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान) के तहत साल 2020 तक करीब 70 लाख Electric Vehicles सड़कों पर दौड़ते देखना चाहती है। लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीक्लस के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए अभी यह दूर की कौड़ी लगती है।