इन जासूसों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें सुबह नेताओं का प्रचार कार्यक्रम थमा दिया जाता है। रोहिणी के मलकीत सिंह, जिन्हें एक पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के रोड शो को कवर करने की जिम्मेदारी सौंपी है, वे बताते हैं, हमें देखना होता कि कोई पार्टी आचार संहिता का उल्लंघन तो नहीं कर रही है। हालांकि हमें चुनाव आचार संहिता के बारे में ज्यादा कुछ नहीं मालूम, लेकिन पार्टी वाले चार-पांच बातें बता देते हैं, बस हमें उन्हीं पर नजर रखनी पड़ती है।
इसी तरह प्रीत विहार निवासी करण भी भाजपा की जासूसी में लगे हैं। इनका कहना है, हमें जिन नेताओं की सूची थमाई जाती है, हम उनके समूह में शामिल हो जाते हैं। कई बार इसमें दिक्कत भी आती है। वो तब, जब हम प्रत्याशी के निकट जाने या उनकी गाड़ियों में तांक-झांक करने का प्रयास करते हैं। पकड़े जाने पर हमसे पूछताछ होती है। कई बार तलाशी की प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। हम यही कहते हैं कि हमारा किसी पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। जैसे और लोग आपके साथ चल रहे हैं, वैसे ही हम भी देख रहे हैं। दूसरे लोग भी वीडियो बनाते हैं तो हम भी बना रहे हैं। इस तरह की बहसबाजी होना आम बात है।
अभी आपको ध्यान होगा कि अमित शाह की रैली में खाली कुर्सियों का एक वीडियो आम आदमी पार्टी ने जमकर चलाया था। उसे सोशल मीडिया पर भी डाल दिया गया। इसी तरह मनोज तिवारी के साथ सपना चौधरी के वीडियो भी शेयर किए गए। भाजपा ने केजरीवाल के शुक्रवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली के गुर्जर चौक से लेकर कौशिक चौक, रहमान चौक, यमुना विहार डिपो, घोंडा चौक और बुलंद मस्जिद तक हुए रोड शो के कई वीडियो शेयर कर दिए। कहा गया कि इनमें भीड़ कम है। बाहर से लोग लाए गए हैं।
इससे पहले एक और इलाके का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कहा गया कि आप संयोजक ने अपना रोड शो इसलिए रद्द कर दिया, क्योंकि वहां भीड़ नहीं जुट पाई। तीन-चार दिन पहले जब अमित शाह की जनसभा हुई थी तो आप ने बसों के फोटो वायरल कर दिए थे। कहा गया कि भाड़े पर बाहर से लोगों को लाया गया है। दक्षिणी दिल्ली के भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूडी के तीन मई के कटवारिया सराय चौपाल और वसंत कुंज के वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिए गए। इसमें दिखाया गया कि आम लोग वहां से नदारद हैं।