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मुश्किल में देशमुख: आईपीएस रश्मि शुक्ला की चिट्ठी से बढ़ा दबाव, फडणवीस ने खोला कच्चा चिट्ठा

Tue, 23 Mar 2021 05:09 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

एंटीलिया मामले के बाद महाराष्ट्र की सियासत गर्माती जा रही है। भााजपा के निशाने पर हैं राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख। देशमुख चूंकि राकांपा से जुड़े हैं, इसलिए पवार उन्हें बचाने में जुटे हैं, लेकिन फडणवीस हमलावर मुद्रा में हैं। 
 
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महाराष्ट्र की आईपीएस रश्मि शुक्ला - फोटो : Social Media
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विस्तार
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महाराष्ट्र की सियासत में उबाल बढ़ता जा रहा है। एंटीलिया के बाहर एसयूवी में विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद सचिन वाजे की गिरफ्तारी और मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से परमबीर सिंह को हटाए जाने से शुरू हुआ घमासान अब निर्णायक मोड़ की ओर है। मंगलवार को पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख की मुश्किलें और बढ़ा दीं। उन्होंने आईपीएस रश्मि शुक्ला के पत्र का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र में ट्रांसफर-पोस्टिंग रैकेट चलने व बड़े नेताओं व अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया। 

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सीआरपीएफ में सहायक महानिदेशक हैं रश्मि शुक्ला
फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला का जिक्र किया वह अभी सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में सहायक महानिदेशक हैं। इससे पहले वह महाराष्ट्र के इंटेलिजेंस विभाग में आयुक्त रह चुकी हैं। महाराष्ट्र की सियासत में उबाल का सबब बने परमबीर सिंह व रश्मि शुक्ला दोनों 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।  रश्मि शुक्ला ने पिछले साल लिखे पत्र में पुलिस के कुछ बड़े अफसरों और अन्य अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के रैकेट में शामिल होने का दावा किया था। पत्र के साथ सबूत के तौर पर रश्मि शुक्ला ने फोन रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया था। 
25 अगस्त 2020 को लिखे पत्र में यह लिखा-
रश्मि शुक्ला ने यह चिट्ठी पिछले साल 25 अगस्त को लिखी थी। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र के पुलिस विभाग में अफसरों की पोस्टिंग और ट्रांसफर रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। इसके तार राज्य के कुछ नेताओं से जुड़े हैं। शुक्ला ने पत्र में लिखा कि मामले से जुड़े लोगों के फोन कॉल ट्रेस किए गए। इसमें रैकेट की बात सच साबित हुई। इससे कुछ दलाल व ताकतवर लोग जुड़े थे। 
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आईपीएस अधिकारी भी इन अवांछित लोगों के संपर्क में थे। 

लिफाफे में फोन रिकॉर्डिंग्स की ट्रांसक्रिप्ट भी

आईपीएस रश्मि शुक्ला ने अपनी चिट्ठी में 2017 के भी एक मामले का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि तब मुंबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इसकी विस्तृत रिपोर्ट में फोन रिकॉर्डिंग्स की ट्रांसक्रिप्ट भी है। शुक्ला ने पत्र में लिखा कि इस पूरे मामले को तुरंत मुख्यमंत्री की जानकारी में लाया जाना चाहिए। 



फडणवीस ने आघाड़ी सरकार व उद्धव को घेरा
रश्मि शुक्ला के पत्र को लेकर भाजपा नेता व पूर्व सीएम फडणवीस ने महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार व उसके मुखिया उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वह इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग करेंगे। सीएम ठाकरे ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। 

परमबीर ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का द्वार, सीबीआई जांच की मांग

उधर, मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। उन्होंने  महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के कथित कदाचार की फौरन सीबीआई से ‘पूर्वाग्रह रहित, अप्रभावित, निष्पक्ष और स्वतंत्र’ जांच कराने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया।
तबादले को मनमाना बताया
आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह ने मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से उनके तबादले को ‘मनमाना’ और ‘गैरकानूनी’ होने का आरोप लगाते हुए इस आदेश को रद्द करने का भी अनुरोध किया है। सिंह ने एक अंतरिम राहत के तौर पर अपने तबादला आदेश पर रोक लगाने और राज्य सरकार, केंद्र तथा सीबीआई को देशमुख के आवास की सीसीटीवी फुटेज फौरन कब्जे में लेने के लिए निर्देश देने का भी अनुरोध किया है।

सबूत नष्ट किए जाने से पहले जांच की मांग

परमबीर सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि सबूत नष्ट कर दिए जाने से पहले, महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के कदाचार की पूर्वाग्रह रहित, अप्रभावित, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाना चाहिए। 

बैठक आयोजित कर दिया था 100 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य
याचिका में सिंह ने आरोप लगाया है कि देशमुख ने अपने आवास पर फरवरी 2021 में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अनदेखी करते हुए अपराध खुफिया इकाई, मुंबई के सचिन वाजे और समाज सेवा शाखा, मुंबई के एसीपी संजय पाटिल सहित अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की तथा उन्हें हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने का लक्ष्य दिया था। साथ ही, विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं अन्य स्रोतों से भी उगाही करने का निर्देश दिया था।

रश्मि शुक्ला ने डीजीपी के संज्ञान में लाया था मामला

सिंह ने कहा कि इस बारे में विश्वसनीय जानकारी है कि टेलीफोन बातचीत सुनने के आधार पर पदस्थापना/तबादलों को लेकर देशमुख के कदाचार को 24-25 अगस्त 2020 को राज्य खुफिया विभाग की खुफिया आयुक्त रश्मि शुक्ला ने पुलिस महानिदेशक के संज्ञान में लाया था। शुक्ला ने  इससे अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग, महाराष्ट्र सरकार को भी अवगत कराया था। सिंह ने कहा कि इसके बाद अनिल देशमुख के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें (रश्मि को) पद से हटा दिया गया।
जांच में दखलंदाजी कर रहे थे देशमुख
मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त ने दावा किया कि देशमुख विभिन्न जांच में दखलअंदाजी कर रहे थे और पुलिस अधिकारियों को अपने मन के अनुरूप एक खास तरीके से जांच करने का निर्देश दे रहे थे। देशमुख का इस तरह का कार्य गृह मंत्री के आधिकारिक पद का दुरूपयोग है। 
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दो साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं करने दिया

याचिका में परमबीर सिंह ने कहा कि 17 मार्च को महाराष्ट्र सरकार की एक अधिसूचना के जरिये उनका मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से होम गार्ड विभाग में मनमाने और गैरकानूनी तरीके से तबादला कर दिया गया, जबकि उन्होंने उस पद पर दो साल का न्यूनतम निर्धारित कार्यकाल भी पूरा नहीं किया था। सिंह ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के पास 25 फरवरी को एक संदिग्ध कार मिलने का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले की जांच अब एनएआई कर रही है। वाहन से जिलेटिन की 20 छड़ें बरामद हुई थीं। उन्होंने कहा कि देशमुख ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही शुरू करने की धमकी दी है। मुंबई के पूर्व सीपी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि देशमुख के कदाचार का खुलासा करने पर उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई से संरक्षण का निर्देश दिया जाए। 
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