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Maharashtra: अब पहले सभी फाइलों की जांच करेंगे शिंदे, बाद में मंजूरी के लिए CM फडणवीस के पास जाएंगी

Thu, 03 Apr 2025 11:28 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महायुति 2.0 के शासन में अब दोबारा से 2023 वाली व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अब सभी फाइलें पहले जांच के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास भेजी जाएंगी। बाद में फाइलों को मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास भेजा जाएगा। यह नया आदेश 18 मार्च को जारी किया गया। 
 
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सीएम देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सभी फाइलों की पहले जांच करेंगे। बाद में, उन फाइलों को मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास भेजा जाएगा। यह आदेश राज्य की मुख्य सचिव सुजाता सौनिक ने 18 मार्च को जारी किया। 

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इस कदम का मकसद 2023 की उस व्यवस्था को फिर से लागू करना है, जिसमें फाइलों की जांच पहले तत्कालीन उपमुख्यमंत्री- अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस करते थे। बाद में उन फाइलों को तत्कालीन सीएम एकनाथ शिंदे के पास भेजा जाता था। 

आदेश के अनुसार, '26 जुलाई, 2023 से फाइलें उपमुख्यमंत्री अजित पवार से लेकर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री फडणवीस के पास भेजी जाती थीं। यह व्यवस्था तब बनी जब उस समय विधानसभा में विपक्ष के नेता पवार 2 जुलाई 2023 को एनसीपी के कुछ विधायकों के साथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गए।'
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फडणवीस के सीएम बनने के बाद बदली थी व्यवस्था
पिछले साल राज्य में विधानसभा हुए। राज्य चुनावों में महायुति- जिसमें भाजपा, शिंदे की शिवसेना और पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल हैं की जीत हुई और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने। फडणवीस के सीएम बनने के बाद व्यवस्था बदल गई। 

नए आदेश के अनुसार यह रहेगी व्यवस्था
नए आदेश के अनुसार, अब सभी फाइलें उपमुख्यमंत्री अजित पवार से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास भेजी जाएंगी। शिंदे की मंजूरी के बाद फाइलें सीएम देवेंद्र फडणवीस के पास भेजी जाएंगी। अजित पवार के पास वित्त विभाग और शिंदे के पास आवास और शहरी विकास विभाग का जिम्मा है। 
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सीएम को संरक्षक मंत्रियों की नियुक्ति पर अपना फैसला लेना पड़ा था वापस

बता दें कि महायुति 2.0 के सत्ता में आने के बाद से, उपमुख्यमंत्री शिंदे और सीएम देवेंद्र फडणवीस के बीच 'शीत युद्ध' की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, दोनों ही नेताओं ने इन अटकलों का जोरदार खंडन किया है। कुछ जिलों के संरक्षक मंत्री पदों को लेकर मतभेद रहे हैं। शिंदे की आपत्ति के बाद फडणवीस को नासिक और रायगढ़ जिलों के संरक्षक मंत्रियों की नियुक्ति पर अपना फैसला वापस लेना पड़ा।

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