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NEET केस: पेपर लीक के बीच सरकार का बड़ा फैसला, एनटीए में दो संयुक्त सचिवों, दो संयुक्त निदेशकों की नियुक्ति की

Sat, 16 May 2026 09:15 PM IST
Rahul Kumar पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में चार बड़े अधिकारियों की नियुक्ति की है। हालांकि घटनाक्रम के बीच सरकार की ओर से यह बड़ा फैसला लिया गया है।  
 
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एनटीए - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में बड़ी प्रशासनिक नियुक्तियां की हैं। एनटीए में चार बड़े अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।  बता दें कि नीट यूजी 2026 पेपर लीक में सीबीआई अब तक नौ लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सीबीआई ने अपनी जांच में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।  

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पांच साल के लिए की गईं नियुक्तियां
सरकार ने एजेंसी में दो नए संयुक्त सचिव और दो संयुक्त निदेशक नियुक्त किए हैं।कार्मिक मंत्रालय के आदेश के अनुसार, भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) की 1998 बैच की अधिकारी अनुजा बापट और भारतीय राजस्व सेवा (कस्टम्स और इनडायरेक्ट टैक्स) की 2004 बैच की अधिकारी रुचिता विज को एनटीए में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है।
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दोनों की नियुक्ति पांच साल के लिए की गई है। इसके अलावा, भारतीय राजस्व सेवा (इनकम टैक्स) के अधिकारी आकाश जैन और भारतीय ऑडिट एवं अकाउंट्स सेवा के अधिकारी आदित्य राजेंद्र भोजगढिया को संयुक्त निदेशक बनाया गया है। सीबीआई ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) का पेपर लीक होने के प्रकरण में मामला दर्ज कर जांच के लिए टीम गठित की हैं। पेपर लीक होने के कारण तीन मई को आयोजित यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। देश भर में एनटीए द्वारा आयोजित इस परीक्षा के लिए लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था।

दूसरी मास्टरमाइंड बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा मांधरे गिरफ्तार
सीबीआई ने नीट-यूजी 2026 पेपरलीक मामले में दूसरी मास्टरमाइंड बायोलॉजी की लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मांधरे को गिरफ्तार किया है। मनीषा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की पेपर-सेटिंग कमेटी से जुड़ी थीं। एक दिन पहले महाराष्ट्र के पुणे से रसायन विज्ञान के प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने कुलकर्णी को मास्टरमाइंड माना है और मनीषा की गिरफ्तारी उनसे पूछताछ के आधार पर हुई है। कुलकर्णी, केमिस्ट्री के विशेषज्ञ हैं और लंबे समय से नीट प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समितियों से जुड़े रहे हैं।

सीबीआई के अनुसार, पुणे की मनीषा मांधरे को एनटीए ने नीट-यूजी परीक्षा प्रक्रिया में विशेषज्ञ के तौर पर नियुक्त किया था। उन्हें बॉटनी व जूलॉजी के प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच थी। एजेंसी ने उन्हें दिल्ली स्थित मुख्यालय में पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। सीबीआई के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2026 के दौरान पुणे की मनीषा वाघमारे ने उनका कई नीट अभ्यर्थियों से संपर्क कराया। वाघमारे को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

राहुल ने की धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की मांग
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करने या प्रधानमंत्री से इसकी जिम्मेदारी लेने को कहा। सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में राहुल ने कहा कि यह एक गठजोड़ है। इसमें आरएसएस भाजपा और विश्वविद्यालयों में बैठे इनके लोग हैं। इनके बीच में पैसे बनाने की सांठगांठ है।

राहुल ने कहा, नीट के 22 लाख अभ्यर्थियों की मेहनत बर्बाद हो गई है। धर्मेंद्र प्रधान कहते हैं कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, जबकि संसदीय समिति ने इस पर सुझाव दिए थे, जिन्हें उन्होंने यह कहकर नजरअंदाज कर दिया कि उसमें विपक्ष के लोग शामिल हैं।  

एनटीए भंग करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के विवाद के बीच यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को मौजूदा स्वरूप में भंग करने की मांग की है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस याचिका में नीट-यूजी 2026 की परीक्षा प्रक्रिया में व्यवस्थित और गंभीर विफलता का आरोप लगाते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की गई है।
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याचिका अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड ऋतु रेनीवाल और अधिवक्ता महेंद्र कुमावत के माध्यम से दाखिल की गई है। इसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत गठित मौजूदा एनटीए को समाप्त कर संसद के कानून के जरिये एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण बनाया जाए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि नई परीक्षा एजेंसी को स्पष्ट कानूनी अधिकार, पारदर्शिता के नियम और संसद के प्रति जवाबदेही के दायरे में लाया जाए। साथ ही, आगामी राष्ट्रीय परीक्षाओं की निगरानी और जीरो-लीक इंटीग्रिटी सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक समिति गठित करने की भी मांग की गई है।
 

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