इस हफ्ते सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से की गई अपील की रही। प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद सत्ता पक्ष के कई नेता पेट्रोल बचाने की मुहिम में लगते दिखे। दूसरी तरफ विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि ये संकट पहले से था सिर्फ उसे चुनाव की वजह से टाला गया। वहीं, इन सबके बीच पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ गए। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पीयूष पंत, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी, अनुराग वर्मा और श्रीनिवास मौजूद रहे।
पीयूष पंत: ये संभावना दिख रही थी कि दाम बढ़ाए जाएंगे। पहले सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर इसे बैलेस करने की कोशिश की। इन सबके बीच गैस के सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित होई। ये दिख रहा था, लेकिन सरकार ये नहीं चाहती थी कि चुनाव पर निगेटिव इंपैक्ट पड़े। चुनाव के बाद जिस तरह की अपील प्रधानमंत्री ने की उससे लगता है कि स्थितियां गंभीर हैं। मुझे लगता है कि अगर विपक्ष चुनाव की बात से जोड़कर अब बढ़े दामों को उठा रहा है तो इसमें बहुत गलत नहीं है।
पूर्णिमा त्रिपाठी: संकट आज से नहीं बल्कि तीन महीने से हमारे सामने खड़ा था। जिस तरह से होर्मुज पर आवाजाही रोकी गई। अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिए, तनाव बढ़ता रहा। तब से ही सबको लग रहा था कि स्थितियां गंभीर हैं। प्रधानमंत्री की अपील तो दुरुस्त आई है, लेकिन मुझे लगता है कि ये देर से आई है। शायद मार्च से ही हमें इस तरह की तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए थीं।
राकेश शुक्ल: समाज को कैसे कंट्रोल करना है उसके हिसाब से नीतियां बन रही हैं. 1970 के दशक से स्थितियां शुरू हुईं और समय के साथ ये बढ़ती गई हैं। दुनियाभर के 15 देश एख दूसरे के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं। संकट है ये तो आम आदमी को भी दिख रहा था। जहां पैकिंग की पन्नी भी विदेश से आनी है वहां इनका असर तो पड़ना ही थीे। सियसी दल राजनीतिक लाभ के लिए समाज को किनारे कर देते हैं। 1960 के दशक से हम डॉलर को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। तब से अलग-अलग कदम उठाए गए हैं।
अनुराग वर्मा: प्रधानमंत्री ने अपील की है आदेश नहीं जारी किया गया है। जो अपील की गई हैं उनमें कोई बुराई नहीं है। प्रधानमंत्री ने जो अपील की है उसमें कुछ नया नहीं है। एक समय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश के लोगों से हफ्ते में एक दिन व्रत रहने की अपील की थी। तब भी देश ने इसे अपनाया था। प्रधानमंत्री ने जो अपील की है उनकी अपील
श्रीनिवास: सच्चाई ये है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें अपने अधिकतम स्तर पर थीं तब ये कीमतें बढ़ने चाहिए थें। हमारे यहां कीमतें तब बढ़ाई गईं जब कीमते अप्रैल के मुकाबले कम हो गई हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान में आज कीमतें पांच रुपये घटाई गईं हैं। ये पूरी तरह से एक भूराजनैतिक राजनीत का खेल भी है।