बालगृह बालिका कांड की हकीकत चाहे जो भी हो, मगर इसने प्रदेश सरकार की खूब किरकिरी कराई है। मुद्दाविहीन विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का बड़ा मौका दिया है। लिहाजा सरकार पूरे मामले में बेहद गंभीर है। इसी वजह से तत्काल डीएम को हटा दिया गया। पूर्व डीपीओ को निलंबित किया और दो अन्य प्रभारी डीपीओ पर कार्रवाई की संस्तुति की गई।
तफ्तीश के लिए अपर मुख्य सचिव के नेतृत्व में दो सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी को घटना के अगले दिन ही देवरिया भेज दिया गया। बिना समय गंवाए सीबीआई को जांच सौंपी और एसआईटी भी गठित कर दी।
इससे साफ है कि सरकार किसी भी स्तर की चूक को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त मिजाज से भली-भांति वाकिफ अफसर-कर्मचारी बेचैन हैं। हर किसी का यही मानना है कि गृह मंडल की इस घटना में वह किसी को बख्शेंगे नहीं।