हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि गर्भावस्था के दौरान पत्नी द्वारा संबंध बनाने से मना करना पति के प्रति क्रूरता नहीं है। अदालत ने कहा इस आधार पर तलाक का कोई आधार नहीं है। अदालत ने पति द्वारा दायर तलाक संबंधी याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा यदि पत्नी सुबह देर से सोकर उठती है और बिस्तर पर चाय की फरमाइश करती है तो स्पष्ट है कि वह आलसी है, लेकिन आलसी होना निर्दयी अथवा क्रूर होना नहीं है।
खंडपीठ ने याची द्वारा परिवारिक अदालत द्वारा उसके तलाक संबंधी आवेदन को खारिज करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। याची ने तर्क रखा था कि उसकी पत्नी पिछले साढ़े चार वर्ष से शारीरिक संबंध बनाने से मना कर रही है जबकि वह किसी भी प्रकार से शारीरिक बीमार नहीं है। यह उसके प्रति क्रूरता है।