भारत में एक भी व्यक्ति डेंगू सीरो निगेटिव नहीं बचा है। इसका मतलब ऐसे व्यक्तियों से है, जिन्हें जीवन में कभी डेंगू न हुआ हो। यानी देश की आबादी में ऐसा कोई नहीं है। इसका नुकसान यह है कि चंद महीने में कोरोना का टीका बनाने वाले भारतीय वैज्ञानिक डेंगू रोधी टीका बनाने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
सरकारी फंड के बिना नहीं बनाएंगे टीका
कोरोना की तरह डेंगू का टीका क्यों नहीं बनाने का सवाल पूछने पर डॉ. निवेदिता ने कहा, यही सवाल आईसीएमआर ने टीका निर्माता कंपनियों से पूछा था। कंपनियों ने कहा कि सरकार के आर्थिक सहयोग के बगैर परीक्षण शुरू नहीं कर सकते हैं। इन्होंने फिलीपींस की उस दुर्घटना का जिक्र किया, जिसमें डेंगवाक्सिया का टीकाकरण होने के बाद कुछ मौत दर्ज हुईं थीं।
बच्चों के लिए बन रहा टीका
भारत में डेंगू रोधी टीके की खोज के लिए दो बड़ी फार्मा कंपनियां खोज में जुटी हैं। इन्हीं में से एक पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) कंपनी ने अपना ट्रायल विदेशी अस्पतालों में भी करने का निर्णय लिया है। सीरम कंपनी दो से 18 साल तक की आयु वालों के लिए टीका पर काम कर रही है। अब तक पहले और दूसरे चरण का ट्रायल पूरा हुआ है। इन दोनों ही परीक्षण में टीका प्रभावी पाया गया है। तीसरे चरण के ट्रायल के लिए उन्हें डेंगू सीरो निगेटिव लोगों की जरूरत पड़ रही है।